प्राचीन भारतीय अभिलेख एवं मुद्राएं-अभिरुचि पर सात दिवसीय कार्यशाला संपन्न
7राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर में “प्राचीन भारतीय अभिलेख एवं मुद्राएं-अभिरुचि कार्यशाला” राष्ट्रीय व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी, विभागाध्यक्ष, प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, दीदउगो विवि, गोरखपुर ने “अभिलेखों एवं मुद्राओं के आलोक में वैष्णव धर्म का विकास” विषय पर विस्तृत जानकारी प्रतिभागियों को दी।
कार्यशाला का समापन सत्र मुख्य अतिथि प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, दीदउगो विवि, गोरखपुर द्वारा अपराह्न 11:30 बजे दीप प्रज्ज्वलन के साथ प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले 70 सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
इसके साथ ही उत्कृष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले छह प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना स्थान प्रदान करते हुए क्रमशः गायत्री सिंह, अनुराधा सिंह, वैष्णवी दुबे, प्रिया राव, संदीप कुमार सरोज एवं मुनील कुमार को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
अपने उद्बोधन में प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि मुद्राएं केवल आर्थिक माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे संस्कृति का कोड होती हैं। इनके माध्यम से सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक परिवर्तनों की महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त होती हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग तथा राजकीय बौद्ध संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय यह कार्यशाला प्रतिभागियों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई है।
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