गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। मिशन शक्ति 5.0 के द्वितीय चरण के अंतर्गत “समाज में बदलाव हेतु प्रयासरत महिलाओं का प्रेरक व्यक्तित्व एवं कृतित्व” विषयक कहानी लेखन प्रतियोगिता का आयोजन राजकीय बौद्ध संग्रहालय के प्रदर्शनी हाल में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्वाह्न 10:30 बजे से 11:30 बजे तक कहानी लेखन प्रतियोगिता के साथ हुआ, जिसके उपरांत दोपहर 12:00 बजे पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध पर्वतारोही दिव्या सिंह उपस्थित रहीं। उन्होंने मार्च 2026 में नेपाल में 5364 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक साइकिल से यात्रा पूरी कर भारत की प्रथम महिला बनने का कीर्तिमान स्थापित किया है। उनके साथ कोच पर्वतारोही उमा सिंह तथा वरिष्ठ चित्रकार भारत भूषण विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन एवं मुख्य अतिथि के सम्मान के साथ हुआ। इसके पश्चात राजकीय बौद्ध संग्रहालय के उपनिदेशक डा. यशवंत सिंह राठौर ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया।

मुख्य अतिथि दिव्या सिंह ने अपने प्रेरक संबोधन में एवरेस्ट बेस कैंप तक की साइकिल यात्रा, प्रशिक्षण एवं संघर्षपूर्ण अनुभव साझा करते हुए छात्राओं को लक्ष्य प्राप्ति के लिए दृढ़ संकल्प और निरंतर परिश्रम का संदेश दिया। वहीं उमा सिंह ने आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास के महत्व पर बल देते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
प्रतियोगिता में कक्षा 9 से 12 तक की बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया और समाज में बदलाव के लिए कार्यरत महिलाओं से प्रेरित अपने विचारों को कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता का मूल्यांकन इन्दिरा गांधी गर्ल्स डिग्री कॉलेज, तारामंडल गोरखपुर की डॉ. जया श्रीवास्तव एवं डॉ. अनुप्रिया मिश्रा द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के अंत में पुरस्कार वितरण किया गया, जिसमें प्रथम स्थान पर दिव्यान्सी, द्वितीय स्थान पर भक्ती सिंह एवं दीक्षा जायसवाल तथा तृतीय स्थान पर अनुष्का यादव रहीं। इसके अतिरिक्त श्रेया पाण्डेय, अन्नू साहनी एवं सोनी यादव को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
यह आयोजन मिशन शक्ति 5.0 के उद्देश्यों के अनुरूप महिलाओं के सशक्तिकरण और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हुआ।
