मेरठ (राष्ट्र की परम्परा)। कपसाड़ गांव में हुए जघन्य हत्याकांड ने न सिर्फ एक महिला की जान ले ली, बल्कि एक पिता के अरमानों और एक मां की ममता को भी हमेशा के लिए छीन लिया। शुक्रवार को मृतका सुनीता का शव घर के आंगन में रखा था। वही आंगन, जहां कुछ ही दिनों बाद बेटी के कन्यादान की तैयारियां होनी थीं, अब मातम और चीख-पुकार से गूंज रहा था। यह दृश्य पत्थरदिल इंसान को भी रुला देने वाला था।
परिवार की आंखों में जहां हत्यारों के लिए गुस्सा और आक्रोश साफ दिख रहा था, वहीं अपनी लाड़ली बेटी रूबी के लिए बेबसी और गहरा दुख भी छलक रहा था। जिस बेटी की शादी की खुशियां घर में आने वाली थीं, वह अब मां के अंतिम दर्शन तक नहीं कर पा रही।
बेटी की शादी के सपने संजोए थी मां सुनीता
सतेंद्र और सुनीता की दुनिया अपने तीन बेटों—नरसी, मनदीप और शिवम—और इकलौती बेटी रूबी के इर्द-गिर्द घूमती थी। तीन बेटों के बाद रूबी का जन्म परिवार के लिए खुशियों की सौगात बनकर आया था। तभी से मां सुनीता ने बेटी के कन्यादान के सपने देखना शुरू कर दिया था।
वह समय अब नजदीक आ चुका था। रूबी का रिश्ता तय हो चुका था और अप्रैल में उसकी शादी होनी थी। सुनीता बेटी की विदाई की तैयारियों में जुटी हुई थी। कपड़े, गहने और घर के इंतजाम—सब कुछ मां अपनी लाड़ली के लिए बड़े अरमानों के साथ कर रही थी। लेकिन किसे पता था कि जिस बेटी को वह डोली में बिठाना चाहती है, उसे दबंग जबरन उठाकर ले जाएंगे।
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जान देकर भी बेटी को नहीं बचा पाई मां
गुरुवार का वह काला दिन परिवार के लिए कभी न भूलने वाला बन गया। जब हमलावरों ने रूबी पर हाथ डाला, तो मां सुनीता बेटी के सामने ढाल बनकर खड़ी हो गई। अपनी जान की परवाह किए बिना उसने आखिरी सांस तक बेटी को बचाने की कोशिश की।
गंभीर रूप से घायल सुनीता को अस्पताल ले जाया गया, जहां वह करीब दो घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझती रही। आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। सुनीता की मौत के साथ ही बेटी की शादी से जुड़े सारे सपने और तैयारियां हमेशा के लिए दफन हो गईं।
भाइयों का दर्द: मां के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाएगी बहन
शुक्रवार को जब सुनीता का शव घर लाया गया, तो आंगन में मौजूद हर आंख नम थी। तीनों भाई नरसी, मनदीप और शिवम फफक-फफक कर रो पड़े। उनकी सिसकियां हर किसी का कलेजा चीर रही थीं।
भाइयों का कहना था कि रूबी मां की सबसे लाड़ली थी। मां उसकी पसंद का हर सामान लाती थी, उसकी हर खुशी का ख्याल रखती थी। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि वह अपनी मां के अंतिम दर्शन तक नहीं कर पा रही। जिस बहन को वे हंसते-खेलते डोली में विदा करने वाले थे, आज वह घर से दूर है और मां इस दुनिया में नहीं रही।
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