July 24, 2024

राष्ट्र की परम्परा

हिन्दी दैनिक-मुद्द्दे जनहित के

विवाह बंधन

परिणय सूत्र बंधन मांगलिक कार्य है,
जिसे सीधी भाषा में विवाह कहते हैं,
डीजे पर नाचना गाना, मद्यपान तथा
हुल्लड़पन को विवाह नही कहते हैं।

संबंधी,मित्र, बराती,नाचते लोगों पर,
पैसा लुटाने को विवाह नही कहते हैं,
विवाह वाले घर में कई कई दिन तक
धूम मचाने को विवाह नहीं कहते हैं।

विवाह बेदी के मंडप के नीचे मंत्र
उच्चारण के साथ देवी देवताओं का
आवाहन करने की वैदिक विधि को
संपन्न कराने को विवाह कहते हैं।

जब पान सुपारी की ज़रूरत होती है,
तो अरे, भूल गए हम सब कह देते हैं,
जबकि कई महीने पहले से ही विवाह
की ज़ोरदार तैयारी हम करते रहते हैं।

विवाह की नहीं कदाचित दिखावे की,
वह भी कर्जा ले लेकर तैयारी होती है,
हमारे ऋषियों ने जो विवाह के लिए
ज़रूरी कहा है हमें अवश्य करना है।

ठीक है अब तक लोगों के विवाह में
खाया है तो खिलाना भी पड़ता ही है,
समयानुसार रीति रिवाज बदल गए हैं,
अब समाज को दिखावे से बचना है।

आदित्य दिखावा करना है, खूब करो
जो विवाह के लिए असली परम्परा है,
वह रीति रिवाज गौण न होने पायें,
जिसे सही मायने में विवाह कहते हैं।

•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’