बिहार (राष्ट्र की परम्परा)। धार्मिक मान्यता का विशेष महत्व रखने वाला हिंदू त्योहार मकर संक्रांति 2026 में भी लोगों में खास उत्साह लेकर आया है। बिहार के लोगों में इस दिन को लेकर विशेष जोश देखा जा रहा है। मकर संक्रांति पर परंपरा के अनुसार दही, चूड़ा और तिलकुट का भोग लगाया जाता है। इस दिन के साथ ही खरमास की समाप्ति हो जाती है और शुभ कार्य आरंभ किए जा सकते हैं।
मकर संक्रांति कब मनाई जाएगी: 14 या 15 जनवरी?
मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाती रही है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह विषय विवाद का कारण बना हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करता है और उत्तरायण होता है, तभी मकर संक्रांति का शुभ दिन माना जाता है।
पटना के प्रख्यात पंडित अशोक द्विवेदी के अनुसार, बिहार में महावीर पंचांग, ऋषिकेश पंचांग और मिथिला पंचांग के अनुसार 14 जनवरी की रात 9:19 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं, लेकिन रात्रि में स्नान और दान संभव नहीं है। इसलिए 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना सबसे शुभ माना जा रहा है।
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15 जनवरी का शुभ मुहूर्त
15 जनवरी को सूर्य उदय के साथ ही पुण्यकाल की शुरुआत होगी। इस दिन सुबह 8:31 से 10:02 बजे तक का समय विशेष शुभ मुहूर्त है, जब स्नान, दान और पूजन करने से अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। दोपहर 1:19 बजे तक पुण्यकाल रहेगा।
संक्रांति पर संगम या नदी में स्नान का महत्व
पंडित अशोक द्विवेदी के अनुसार, मकर संक्रांति का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन संगम या किसी प्रसिद्ध नदी जैसे गंगा, यमुना में स्नान करना अत्यधिक पुण्यदायक माना जाता है। यदि बड़ी नदियां उपलब्ध न हों तो किसी तालाब, कुआं या छोटी नदी में भी स्नान लाभकारी होगा।
स्नान के बाद दान और पुण्य कार्य का विशेष महत्व है। इसमें ऊनी कपड़े, काला कंबल और धार्मिक पुस्तकें दान करना फलदायी माना जाता है। काला तिल और गुड़ का दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। गरीबों को भोजन कराना भी इस दिन की विशेष धार्मिक परंपरा है।
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