पटना/बिहार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राज्य के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए यह बड़ी राहत की खबर है। बिहार सरकार ने पहली बार स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर अब प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। यह अहम फैसला सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘सात निश्चय-3’ के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और भरोसेमंद बनाना है।
सरकार का मानना है कि डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगने से वे अस्पताल में पूरा समय देंगे, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज मिल सकेगा। लंबे समय से यह शिकायत सामने आती रही है कि कई डॉक्टर अस्पताल की ड्यूटी के दौरान या बाद में निजी क्लिनिक में अधिक समय देते हैं, जिससे सरकारी अस्पतालों में मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
सात निश्चय-3 के पांचवें संकल्प ‘सुलभ स्वास्थ्य-सुरक्षित जीवन’ के तहत सरकार ने दूरदराज के इलाकों में सेवा देने वाले चिकित्सकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना की घोषणा की है। ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में बेहतर इलाज देने वाले डॉक्टरों को वेतन के अलावा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
सरकार के 2025-26 के स्वास्थ्य रोडमैप में यह भी तय किया गया है कि प्रखंड स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्पेशलिटी हॉस्पिटल के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां कुछ विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होगी। वहीं जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के रूप में अपग्रेड किया जाएगा, ताकि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेजों पर निर्भरता कम हो सके।
इसके साथ ही राज्य में नए मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की स्थापना और मौजूदा संस्थानों में गुणवत्ता सुधार के लिए लोक-निजी भागीदारी (PPP मॉडल) को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार प्रतिष्ठित निजी अस्पताल समूहों को भी बिहार में निवेश के लिए आमंत्रित करेगी।
यह फैसला बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है, जिससे आम जनता को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
बिहार के सरकारी अस्पतालों में बड़ा बदलाव: डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर पहली बार लगेगी रोक
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