Tuesday, January 13, 2026
HomeUncategorizedमहराजगंज : अवसर बहुत, अमल कम

महराजगंज : अवसर बहुत, अमल कम

कैलाश सिंह
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता, उपजाऊ कृषि भूमि, घने वन क्षेत्र, अंतर्राष्ट्रीय सीमा से जुड़ा भौगोलिक महत्व और मेहनतकश किसान-मजदूरों की विशाल जनशक्ति—इन तमाम खूबियों के बावजूद महराजगंज जनपद आज भी विकास की दौड़ में अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका है। सरकारी योजनाओं, घोषणाओं और बजट की कोई कमी नहीं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि अधिकांश योजनाएं कागजों तक सिमट कर रह जाती हैं। यही कारण है कि महराजगंज की पहचान धीरे-धीरे “अवसर बहुत, अमल कम” वाले जिले के रूप में बनती जा रही है।
कृषि प्रधान जनपद होने के नाते महराजगंज में सिंचाई, भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। बावजूद इसके किसान आज भी अनियमित सिंचाई व्यवस्था, जर्जर नहरों, टेल तक पानी न पहुंचने के कारण किसानों पर संकट बना रहता है।धान, गेहूं, गन्ना, दलहन और सब्जी उत्पादन की क्षमता होते हुए भी किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। कोल्ड स्टोरेज और कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना की योजनाएं वर्षों से चर्चा में हैं, लेकिन धरातल पर उनकी मौजूदगी न के बराबर है। परिणामस्वरूप किसान लागत निकालने के लिए संघर्ष करता है और युवाओं का खेती से मोहभंग बढ़ता जा रहा है।
शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में भी तस्वीर चिंताजनक है। सरकारी स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों के भवन तो बने हैं, लेकिन शिक्षकों, डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और आधुनिक संसाधनों की कमी है। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आज भी गंभीर इलाज के लिए जिला मुख्यालय या गोरखपुर जैसे बड़े शहरों की ओर रुख करने को मजबूर हैं। शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता की कमी और संसाधनों का अभाव बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े करता है।
सड़क, पेयजल, आवास और रोजगार से जुड़ी योजनाएं सरकारी रिपोर्टों में भले ही पूरी दिखाई देती हों, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों की पोल खोल देती है। गांवों में अधूरी सड़कें, जर्जर नालियां, बरसात में जलभराव और गर्मी में पेयजल संकट आम समस्या बन चुके हैं। मनरेगा जैसी योजनाओं में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें विकास की धीमी रफ्तार को उजागर करती हैं। रोजगार के अभाव में आज भी बड़ी संख्या में युवा पलायन को मजबूर है। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि महराजगंज की सबसे बड़ी समस्या योजनाओं की कमी नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और सख्त निगरानी का अभाव है। प्रशासनिक पारदर्शिता, समयबद्ध कार्यवाही और जिम्मेदारी तय किए बिना विकास केवल आंकड़ों और फाइलों तक ही सीमित रहेगा। आज भी जनता उम्मीद लगाए बैठी है कि शासन और प्रशासन जमीनी सच्चाइयों को समझते हुए विकास कार्यों में ईमानदारी और गति लाएगा। यदि योजनाओं को ईमानदारी से लागू किया जाए, स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास की रणनीति बने और जनप्रतिनिधि व अधिकारी जवाबदेह हों, तो महराजगंज को पीछे नहीं रखा जा सकता।
अवसर आज भी मौजूद हैं, जरूरत है केवल उन्हें कागजों से निकालकर धरातल पर उतारने की। तभी महराजगंज वास्तव में संभावनाओं को अमल में बदलते हुए एक सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध जनपद के रूप में अपनी पहचान बना सकेगा।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments