हाशिये से मुख्यधारा तक, ज़मीन पर दिखता विकास का बदलाव
कैलाश सिंह
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। नेपाल सीमा से सटा महराजगंज जिला लंबे समय तक उपेक्षा, सीमित संसाधनों और विकास की धीमी गति का प्रतीक माना जाता रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा चुनौतियां और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने जिले को हाशिये पर बनाए रखा। लेकिन बीते पांच वर्षों में महराजगंज की तस्वीर में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है, जिसने जिले के आत्मविश्वास को नई पहचान दी है।
सड़क और संपर्क व्यवस्था में सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, आवास और राशन की बेहतर पहुंच ने विकास को जमीन पर उतारा है। सीमावर्ती सुरक्षा को मजबूत करने और प्रशासनिक सतर्कता बढ़ाने से जिले को मुख्यधारा से जोड़ने की ठोस कोशिश दिखाई देती है। सरकारी योजनाएं अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि आम लोगों तक अधिकार के रूप में पहुंचती नजर आ रही हैं।
जल जीवन मिशन के तहत घर-घर पेयजल आपूर्ति, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली ने ग्रामीण जीवन की बुनियादी समस्याओं को काफी हद तक कम किया है। इन योजनाओं का प्रभाव महराजगंज के गांवों में साफ तौर पर देखा जा सकता है, जहां सुविधाओं की पहुंच ने जीवन स्तर में सुधार किया है।
पूर्वांचल के संदर्भ में गोरखपुर की भूमिका भी बदली है। कभी केवल राजनीतिक पहचान तक सीमित रहा गोरखपुर, भाजपा सरकार के कार्यकाल में विकास के केंद्र के रूप में उभरा है। एम्स, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार ने इसे पूर्वांचल की स्वास्थ्य धुरी बना दिया है। सड़क, रेल कनेक्टिविटी, औद्योगिक निवेश और शहरी सुविधाओं के विस्तार ने गोरखपुर को आर्थिक नक्शे पर मजबूती से स्थापित किया है।
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पूर्वांचल की पारंपरिक समस्याएं—पलायन, बेरोजगारी और कमजोर कानून-व्यवस्था—लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं। वर्ष 2020 से 2025 के बीच कानून-व्यवस्था में सुधार और गरीब कल्याण योजनाओं की सीधी पहुंच ने क्षेत्र में भरोसे की वापसी कराई है। रोजगार योजनाएं, आवास, सिंचाई और स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार से पूर्वांचल अब केवल श्रम देने वाला क्षेत्र नहीं, बल्कि संभावनाओं का क्षेत्र बनता दिख रहा है।
महराजगंज की सीमाएं हों, गोरखपुर की रफ्तार, पूर्वांचल की उम्मीदें या बुंदेलखंड का संघर्ष—इन वर्षों में यह स्पष्ट हुआ है कि उत्तर प्रदेश का विकास अब किसी एक शहर या वर्ग तक सीमित नहीं है। भाजपा का 2020–2025 का कार्यकाल इस बात का संकेत देता है कि प्रदेश को चुनावी नहीं, बल्कि क्षेत्रीय जरूरतों के दृष्टिकोण से देखा गया है। आने वाले समय में यह कार्यकाल उत्तर प्रदेश में बदले हुए आत्मविश्वास और जमीन पर दिखते विकास के रूप में याद किया जाएगा।
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