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कानून बेबस: अवैध टैक्सी स्टैंड बेलगाम,क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा यातायात अमला

मुख्यमंत्री के निर्देश हवा में, मुख्य चौराहे पर खुलेआम टैक्सी स्टैंड
पुलिस बूथ बना अवैध टैक्सी अड्डा,वीआईपी प्रोटोकॉल तक सीमित सख्ती, बाद में सब कुछ जस का तस

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। एन एच 730 स्थित शिकारपुर चौराहा मार्ग का मुख्य तिराहा इन दिनों अवैध टैक्सी स्टैंड पर मछली बिक्री के कारण गंभीर अव्यवस्था का केंद्र बना हुआ है। मुख्य चौराहे पर टैक्सियों को खड़ा कर सवारियां भरना स्पष्ट रूप से अवैध है, इसके बावजूद यहां प्रतिदिन दर्जनों नहीं बल्कि सैकड़ों वाहन खड़े कर यात्रियों को बैठाया जाता है।प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार सार्वजनिक रूप से यह घोषणा कर चुके हैं कि मुख्य चौराहों और तिराहों पर टैक्सी स्टैंड किसी भी सूरत में नहीं बनाए जाएंगे, लेकिन शिकारपुर तिराहे पर इन निर्देशों का असर सिफर दिखाई देता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि टैक्सी स्टैंड की भीड़ के कारण कभी-कभी आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं, लेकिन यातायात अमले की नजर इस अव्यवस्था पर कभी नहीं पड़ती है।
हैरानी की बात यह है कि वीआईपी या प्रोटोकॉल मूवमेंट के दौरान कुछ समय के लिए वर्दीधारी कर्मी दिख जाते हैं, लेकिन प्रोटोकॉल समाप्त होते ही पूरा इलाका फिर अवैध टैक्सी स्टैंड में तब्दील हो जाता है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित रह जाती है।
सूत्रों के अनुसार विभाग के कुछ जिम्मेदार कर्मी मुखबिरों के माध्यम से वसूली में सक्रिय बताए जाते हैं। यही कारण है कि अवैध टैक्सी स्टैंड पर आज तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकी है। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि पुलिस बूथ स्वयं टैक्सी स्टैंड जैसा दृश्य प्रस्तुत करने लगा है।स्थिति यह भी है कि टैक्सी स्टैंड पर वसूली करने वाले और ठेकेदारों के बीच कई बार मारपीट की नौबत आ जाती है, लेकिन उन बेगुनाह लोगों को कोई प्रशासनिक संरक्षण नहीं मिल पाता। कानून यहां नरम और जेब गरम की कहावत को चरितार्थ करता नजर आ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी दर्दनाक दुर्घटना के बाद ही यातायात विभाग की आंख खुलेगी? या फिर पहले ही इस अवैध टैक्सी स्टैंड पर सख्त कार्रवाई कर आम जनता को राहत दी जाएगी।आए दिन दुर्घटना का भय बना रहता है।दुर्घटना होने के बाद उसका जिम्मेदार कौन यातायात व्यवस्था या अवैध टैक्सी स्टैंड वसूली।
अब जरूरत है कि जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी स्थल निरीक्षण कर निष्पक्ष जांच कराएं और मुख्यमंत्री के निर्देशों को कागजों से निकालकर जमीनी स्तर पर लागू करें।

rkpnews@desk

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