बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l मौनी अमावस्या के अवसर पर सरयू नदी की पवित्र जलधारा में लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था व श्रद्धा के साथ डुबकी लगाई। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने घाटो व नगर की चौराहों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये थे, ताकि दूर दराज से आये हुए श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी ना होने पाए। प्रशासन ने भारी भीड़ को लेकर 4 थानों के फोर्स तथा अर्धसैनिक बल भी तैनात किए गए थे।प्रशासन द्वारा वाहनों को नगर क्षेत्र के बाहर ही बैरिकेट लगाकर रोक दिया गया था, क्योकि पूरे नगर की सड़कों पर पैदल चलना मुश्किल था।
स्थानीय लोगों द्वारा बताया गया कि पूर्व में यहां पर स्नान करने के लिए एक माह पहले से मेले का आयोजन किया जाता था।और लोग रेलवे स्टेशन पर, रैन बसेरों में अपना डेरा जमाए रहते थे। कोरोना काल के बाद आज पहली बार ऐसा प्रतीत हो रहा है, की बरहज में सरजू नदी पर स्नान करने के लिए वर्षों बाद इतनी भीड़ देखने को मिली हैं। पौराणिक मान्यताओं में यह मेला त्रेता युग से चलता आ रहा है। पुराणों में मौनी अमावस्या के स्नान को पवित्र माना जाता है। बताया जाता है कि इस दिन स्नान करने से मनुष्य के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
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