Friday, January 16, 2026
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करवा चौथ: संस्कृति, परंपरा और अखंड सौभाग्य का महापर्व

पति की लंबी आयु के लिए बुधवार को व्रत रखेंगी सुहागिन, बाजारों में रही चहल-पहल

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। कार्तिक शुक्ल कृष्ण चतुर्थी को करवा चौथ व्रत का सुहागिनें रखेंगी। जिसे लेकर कई दिनों से बाजार में चहल- पहल बढ़ गई है। महिलाएं ने व्रत से संबंधित सामानों की खरीदारी कर रही हैं। सुहागिनों को वर्ष भर इस दिन का बेसब्री से इंतजार होता है। करवा चौथ व्रत सुहागिनों के लिए बहुत खास होता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रति वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ व्रत रखा जाता है।इस दिन विवाहित स्त्रियां शिव परिवार अर्थात भगवान शिव, माता पार्वती और कार्तिकेय के साथ भगवान गणेश जी की पूजा करती हैं। सुहागिने चंद्र दर्शन के पश्चात अर्घ्य देने के बाद पारण करती हैं।
व्रती सुहागिनें बिना अन्न-जल ग्रहण किए सूर्योदय से चंद्र दर्शन तक रहतीं हैं।
इसे करक चतुर्थी भी कहा जाता है। करवा या करक मिट्टी का वह पात्र होता है, जिससे चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। पूजन में करवा बहुत महत्वपूर्ण होता है।मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से पति को लंबी आयु की प्राप्ति होती है और वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है। इसलिए व्रती सुहागिने पूरे विधि- विधान से इस व्रत को करती है।

करवा चौथ व्रत विधान
सूर्योदय से पूर्व स्नानादि से निवृत्त हो कर घर के पूजा स्थान की साफ- सफाई कर दीपक जलने के साथ देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। फिर निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं। इस पावन अवसर पर शिव परिवार का पूजन-अर्चन विशेष रूप की जाती है।
इस व्रत में चंद्रमा की पूजा भी की जाती है। चंद्र दर्शन के बाद पति को चलनी से देखने की भी परंपरा है। तत्पश्चात पति, पत्नी को पानी पिलाकर व्रत तोड़वाता है।
व्रती सुहागिनें करवा चौथ के दिन को सफेद रंग के वस्त्र धारण नहीं करती हैं। सफेद रंग सौम्यता व शांति का प्रतीक होता है, लेकिन करवा चौथ व्रत में इस रंग के वस्त्र धारण करने से बचा जाता है। इसके साथ ही इस दिन काले रंग के वस्त्र भी नहीं धारण करना चाहिए। सनातन धर्म में शुभ कार्य के दौरान काला रंग पहनने की मनाही होती है। उसे अशुभ माना जाता है। सुहागिनों को मान्यता के अनुसार सिर्फ मंगलसूत्र के काले दाने के अलावा किसी का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
इस साल करवा चौथ पूजा और शुभ मुहूर्त चतुर्थी तिथि 31 अक्टूबर को रात 9:30 पर प्रारंभ हो कर 01 नवंबर, बुधवार की रात 9:19 बजे पर समाप्त होगी।
इस तरह उदया तिथि की मान्यतानुसार करवा चौथ व्रत एक नवंबर को रखा जाएगा। करवा चौथ पूजा मुहूर्त एक नवंबर को शाम को सूरज ढलने के बाद से चाँद दर्शन तक रहेगा। चंद्रोदय का समय है रात 8:10 बजे।
चंद्र दर्शन के पश्चात व्रती अपने घर परिवार की सुख समृद्धि का कामना के पश्चात पारण करेंगी।

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