सुलह से न्याय: आगरा में मध्यस्थता अभियान बना आमजन के लिए राहत

आगरा में मध्यस्थता अभियान 2.0 को मिला विस्तार, 15 फरवरी 2026 तक सुलह से निपटेंगे मुकदमे


आगरा (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद आगरा में लंबित मुकदमों के शीघ्र और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 की अवधि को बढ़ाकर अब 15 फरवरी 2026 तक कर दिया गया है। यह अभियान माननीय जनपद न्यायाधीश संजय कुमार मलिक के मार्गदर्शन में संचालित हो रहा है, जिसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को सरल, त्वरित और आमजन के अनुकूल बनाना है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आगरा की सचिव (पूर्णकालिक) विनीता सिंह-प्रथम ने बताया कि यह अभियान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के दिशा-निर्देशों के अनुरूप चलाया जा रहा है। पहले चरण में मिले सकारात्मक परिणामों के बाद मध्यस्थता के लिए मामलों को संदर्भित करने की समय-सीमा 01 फरवरी 2026 से 15 फरवरी 2026 तक बढ़ाई गई है।
सुलह और समझौते पर विशेष जोर
राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 के अंतर्गत सुलह वार्ता, आपसी समझौते और मध्यस्थता के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों के निस्तारण पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए आगरा जनपद के सभी न्यायालयों के साथ-साथ वाह्य न्यायालयों से भी अनुरोध किया गया है कि वे सुलह योग्य मामलों को मध्यस्थता के लिए भेजें।
इस पहल से न केवल न्यायालयों पर बढ़ते बोझ में कमी आएगी, बल्कि वादकारियों को लंबी सुनवाई, आर्थिक खर्च और मानसिक तनाव से भी राहत मिलेगी।

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किन मामलों का होगा निस्तारण
अभियान के तहत उन मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है जिनमें आपसी सहमति की संभावना अधिक है। इनमें प्रमुख रूप से—पारिवारिक विवाद, वैवाहिक और घरेलू मामले,संपत्ति व बंटवारे से जुड़े वाद,चेक बाउंस और धन वसूली के मामले,दीवानी वाद,अन्य सुलह योग्य विवाद,शामिल हैं। मध्यस्थता प्रक्रिया में दोनों पक्षों को निष्पक्ष वातावरण में अपनी बात रखने का अवसर मिलता है, जिससे विवाद का समाधान स्थायी और सौहार्दपूर्ण रूप से संभव होता है।
आमजन के लिए क्यों है फायदेमंद
राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 आम नागरिकों के लिए एक सुनहरा अवसर है। वर्षों से लंबित मुकदमों का समाधान कम समय में हो सकता है। इससे न्यायालय शुल्क, वकीलों की फीस और अन्य खर्चों में उल्लेखनीय कमी आती है। साथ ही न्याय व्यवस्था पर आमजन का विश्वास भी मजबूत होता है।
15 फरवरी तक भेजी जा सकेंगी पत्रावलियां
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आगरा ने स्पष्ट किया है कि 15 फरवरी 2026 तक मध्यस्थता के लिए चिन्हित मामलों की पत्रावलियां भेजी जा सकती हैं। निर्धारित समय सीमा में प्राप्त मामलों को प्राथमिकता के आधार पर मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
न्यायिक सुधार की दिशा में मजबूत कदम
यह अभियान “न्याय में देरी, न्याय से वंचित” की सोच को बदलने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। सुलह, संवाद और समझौते के जरिए भारतीय न्याय प्रणाली को अधिक मानवीय, सुलभ और प्रभावी बनाने में राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 मील का पत्थर साबित हो रहा है।

Editor CP pandey

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