महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। पनियरा ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत जड़ार में रविवार को आध्यात्मिक चेतना, भक्ति और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रज्ञा पुराण कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ, जिसने पूरे गांव को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। श्रद्धा, उल्लास और सामूहिक सहभागिता ने इस आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
यज्ञ स्थल से प्रारंभ हुई कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भाग लिया। युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सहभागिता ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। यात्रा ग्राम सभा के विभिन्न पुरवों से होती हुई जड़ार चौराहे तक पहुंची। मार्ग में ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। शंखध्वनि, भक्ति गीतों और जयघोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा।
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जड़ार चौराहे पर ग्रामवासी बच्चा पटेल द्वारा कलश यात्रियों को मीठा पानी पिलाकर आत्मीय स्वागत किया गया। यह सेवा भाव सामाजिक सौहार्द, अपनत्व और सामूहिक चेतना का प्रेरक उदाहरण बना।
कार्यक्रम में शांतिकुंज हरिद्वार से पधारे युगदूतों ने युग संगीत और प्रेरक प्रवचनों के माध्यम से मानव में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण जैसे युग संदेशों को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आत्मिक जागरण, चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों के बिना समाज और राष्ट्र का स्थायी उत्थान संभव नहीं है।
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यह आयोजन युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के सूक्ष्म संरक्षण तथा माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। प्रज्ञा पुराण कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नशा प्रवृत्ति, सामाजिक कुरीतियों, वैमनस्य और नैतिक पतन से समाज को मुक्त कर सकारात्मक सोच और संस्कारों का विस्तार करना है।
आयोजकों के अनुसार आगामी 9 फरवरी से प्रातः 8 बजे सामूहिक पंचकुंडीय यज्ञ का आयोजन किया जाएगा, जो लगातार तीन दिनों तक चलेगा। इसमें क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं की सहभागिता अपेक्षित है। यज्ञ और कथा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण, सनातन संस्कृति संरक्षण और सामाजिक जागरण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया है।
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कार्यक्रम की सफलता में ग्रामवासियों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। जड़ार और आसपास के क्षेत्रों में आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण है और लोग बढ़-चढ़कर सहभागिता निभा रहे हैं। प्रज्ञा पुराण कथा न केवल आस्था का पर्व बन रही है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और नैतिक उत्थान का सशक्त माध्यम भी सिद्ध हो रही है।
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