पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच Iran से बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। तेहरान की Assembly of Experts ने 56 वर्षीय Mojtaba Khamenei को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना है।
मोजतबा, पूर्व सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei के सबसे बड़े बेटे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका चयन Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के प्रभाव और समर्थन के बीच हुआ।
फैसले पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
मोजतबा खामेनेई का चयन कई राजनीतिक और धार्मिक बहसों को जन्म दे रहा है:
• ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक ने हमेशा वंशानुगत शासन (Hereditary Rule) की आलोचना की है।
• देश खुद को एक “धार्मिक लेकिन निर्वाचित संरचना” के रूप में प्रस्तुत करता रहा है।
• शिया धार्मिक परंपरा में पिता से बेटे को सीधे सर्वोच्च सत्ता सौंपना सामान्य परंपरा नहीं मानी जाती।
• बताया गया है कि पिछले वर्ष अली खामेनेई ने जिन संभावित उत्तराधिकारियों की सूची बनाई थी, उसमें मोजतबा का नाम शामिल नहीं था।
इन कारणों से यह फैसला देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की भूमिका
ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन सीधे जनता द्वारा नहीं, बल्कि धार्मिक विद्वानों की संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स करती है। यह संस्था देश के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक पद पर नियुक्ति का अधिकार रखती है।
हालांकि, इस बार चयन प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और स्वतंत्रता पर सवाल उठाए जा रहे हैं, खासकर IRGC के संभावित दबाव की खबरों के कारण।
क्षेत्रीय और वैश्विक असर
पश्चिम एशिया में पहले से जारी सैन्य तनाव के बीच नेतृत्व परिवर्तन का असर:
• ईरान की आंतरिक राजनीति पर
• क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर
• अमेरिका और इजराइल के साथ संबंधों पर
• खाड़ी देशों की रणनीति पर
पड़ सकता है।
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