Monday, March 30, 2026
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तीन संस्थाओं के ब्रांड एंबेसडर बने अंतरराष्ट्रीय किकबॉक्सर सनी सिंह, गोरखपुर का बढ़ाया मान

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र और अंतरराष्ट्रीय किकबॉक्सर सनी सिंह ने एक बार फिर जिले को गौरवान्वित किया है। उनकी खेल प्रतिभा और सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें ऐशप्रा फाउंडेशन (स्पोर्ट्स), फ्लाईअप फाउंडेशन (नवाचार लैब) और यूनाइटेड यूथ एसोसिएशन ऑफ पूर्वांचल का आधिकारिक ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया गया है। इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय में खुशी का माहौल है और इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि माना जा रहा है।
इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि यह पूरे विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि ये संस्थाएं समाज और छात्रों के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और सनी सिंह का चयन इस दिशा में एक सकारात्मक संदेश देता है। सनी न केवल खेल के मैदान में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जो उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाता है।
वहीं, ऐशप्रा ग्रुप के चेयरमैन अतुल सराफ ने सनी को दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनकी ऊर्जा और समर्पण युवाओं को खेलों की ओर प्रेरित करेगा। फ्लाईअप फाउंडेशन के संस्थापक अभय सिंह ने कहा कि सनी तकनीक और खेल के बीच संतुलन बनाकर नई पीढ़ी के लिए मिसाल पेश कर रहे हैं, जबकि यूनाइटेड यूथ एसोसिएशन के संस्थापक नारायण दत्त पाठक ने उन्हें पूर्वांचल के युवाओं के लिए एक आदर्श बताया।
सनी सिंह का सफर केवल खेल उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने समाज सेवा के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। लगातार तीन वर्षों (2023-2025) तक नेशनल मेडलिस्ट रहने के साथ-साथ उन्होंने 2025-2026 में दो बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। उज्बेकिस्तान में आयोजित वर्ल्ड कप में उन्होंने टॉप-10 खिलाड़ियों में स्थान बनाते हुए 5वीं रैंक हासिल की, वहीं अबू धाबी (UAE) में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में टॉप-20 फाइटर्स में 9वीं रैंक प्राप्त की।
खेल के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए सनी सिंह ने ‘मिशन अपराजिता’ के माध्यम से अब तक 5,000 से अधिक बेटियों को नि:शुल्क आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किया है। उनका यह प्रयास महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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