भारत के लेखकों को भारतीय संवेदनाओं से जुड़ना होगा : प्रो. विकास शर्मा

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम साहित्यिक अभिरुचि को बढ़ाने का कार्य करते हैं

अंग्रेजी विभाग में आयोजित हुआ “मीट द ऑथर” कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास के भाई प्रो. विकास शर्मा ने लेखक के रूप में रखी अपनी बात

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के अंग्रेजी विभाग में “मीट द ऑथर” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास के भाई तथा वर्तमान में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के हेड एवं प्रसिद्ध कवि एवं उपन्यासकार प्रोफेसर विकास शर्मा ने लेखक के रूप में अपने विचार रखे कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय कुलपति प्रो. पूनम टंडन द्वारा की गई। विशिष्ट अतिथि के रूप में अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो अनुभूति दूबे उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की पूजा एवं दीप प्रजवल्लन द्वारा किया गया।कुलपति प्रो पूनम टंडन ने स्मृति चिन्ह देकर प्रो. शर्मा का स्वागत किया
अपने स्वागत भाषण में विभागाध्यक्ष प्रो. अजय कुमार शुक्ला ने कार्यक्रम की महत्ता के ऊपर प्रकाश डाला और उन्होंने बताया कि साहित्य में रचनात्मकता की अपार संभावनाएं रहती हैं। ऐसे में प्रो विकास शर्मा का विद्यार्थियों से संवाद काफ़ी लाभदायक रहेगा। उन्होंने प्रो शर्मा की सभी उपन्यासों को सारांश में बताया।
कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विभाग द्वारा किए गए इस कार्यक्रम के आयोजन की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने प्रोफेसर विकास शर्मा द्वारा लिखी गई उपन्यासों में समसामयिक मुद्दों को उठाने के लिए उनकी लेखनी की सराहना की।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम साहित्यिक अभिरुचि को बढ़ाने का कार्य करते हैं और विद्यार्थियों को ऐसे कार्यक्रमों में प्रतिभाग करते रहना चाहिये। अंग्रेज़ी विभाग के विद्यार्थी हमेशा उत्साही एवं जिज्ञासु रहते हैं।
प्रोफेसर विकास शर्मा ने लेखक के रूप में अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत के लेखकों को भारतीय संवेदनाओं से जुड़ना होगा। उन्हें भारतीय ज्ञान परम्परा, संस्कृति और विरासत को समाहित करते हुए लिखना चाहिए। अंग्रेज़ी भाषा को केवल टूल के रूप में प्रयोग करना चाहिये। उन्होंने अपने द्वारा लिखे गए सभी 10 उपन्यासों के बारे में संक्षेप में बताते हुए अपने द्वारा लिखी गई कविताओं का भी वाचन किया। उनके द्वारा लिखी गई उपन्यास जैसे राह के पत्थर, नेवर टुगेदर नेवर अपार्ट, एशेज एंड फायर,सना , होप अगेंस्ट होप की थीम्स तथा उनसे जुड़े अपने अनुभवों को भी साझा किया। अभी हाल ही में आई उपन्यास “मीडिया रिवोल्यूशन” की भी उन्होंने चर्चा की जिसकी पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश का एक विश्वविद्यालय है। शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने प्रो. विकास शर्मा से संवाद स्थापित करते हुए कई प्रश्न भी पूछे।
कार्यक्रम में स्वागत गीत एम.ए. द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा आरुषि गौतम द्वारा तथा कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर अनुभूति दुबे व कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर आमोद राय द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम में विभाग के सभी शिक्षक, शोध छात्र एवं पीजी के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

rkpnews@desk

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