विराट वृक्ष की फलदार शाखाएं हैं भारतीय भाषाएं : प्रोफेसर पूनम टंडन

महाकवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती पर भारतीय भाषा उत्सव का भव्य आयोजन संपन्न

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में आयोजित ‘भारतीय भाषा उत्सव’ की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि भारतीय भाषाएं भारत की शक्ति हैं। भारतीय भाषाएं परंपरा, संस्कृति, अनुभव, ज्ञान व स्मृति की जीवंत धाराएं हैं। जिनके मिलने से महान भारत का परिदृश्य उभरता है। वैश्विक मंच पर भारत को एक सशक्त हस्ताक्षर के रूप में स्वीकार किया जाता है, तो इसमें भारत की भाषाई शक्ति व समृद्धि को एक बड़ी वजह के रूप में देखा जा सकता है। भारत रूपी विराट वृक्ष की फलदार शाखाएं हैं भारतीय भाषाएं।
प्रो. टंडन ने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में भारत की स्थिति यूरोप से अलग है। यूरोप में एक भाषा सिद्धांत उनके राष्ट्र को जोड़ता है तो भारत की भाषाई विविधता उसे बेजोड़ बनाती है।
कुलपति ने कहा कि किसी देश की प्रगति वहां की भाषाई प्रगति से भी मापी जा सकती है। इस मामले में भारत अनोखा देश है। भाषाओं के उत्सव की दृष्टि से भारत से बेहतर दुनिया का कोई अन्य देश नहीं हो सकता। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय भाषाओं के साथ-साथ हमारे विद्यार्थियों को कुछ विदेशी भाषाओं का भी ज्ञान होना चाहिए।
महाकवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती पर आयोजित इस ‘भारतीय भाषा उत्सव’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अंग्रेजी विभाग की प्रोफेसर सुनीता मुर्मू ने कहा कि भारत की भाषाई विविधता उसके ‘बैंक ऑफ़ नॉलेज’ का सूचक है। प्रत्येक भाषा के प्रति संवेदनशीलता व सम्मान का भाव हमें बेहतर मनुष्य बनाता है. जहां विविधता होती है वही खूबसूरत संवाद भी होते हैं। इस दृष्टि से हमें भारत पर गर्व होना चाहिए।
उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर रजीउर रहमान ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी और उर्दू एक ही माँ की बेटी हैं। फर्क है तो बस लिपि और तलफ्फुस का। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में एक भाषा संकाय की जरूरत है जहां विविध भाषाओं के विद्यार्थी आपस में संवाद कायम कर सकें।
संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य डॉ. देवेंद्र पाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वेदों के संदर्भ को उद्घाटित किया। हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल राय ने ‘भारतीय भाषा उत्सव’ के तहत ‘राष्ट्र निर्माण में भारतीय भाषाओं की भूमिका’ विषय पर अपना विशद व्याख्यान दिया। हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर कमलेश कुमार गुप्त ने स्वागत वक्तव्य दिया।
डॉ. सुनील कुमार ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया तथा डॉ. रितु सागर ने सबके प्रति आभार प्रकट किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के शोधार्थी एवं शिक्षक गण शामिल हुए।

rkpNavneet Mishra

Recent Posts

सरकारी योजना का लाभ पाने का मौका, जरूरी दस्तावेजों के साथ 31 जुलाई को पहुंचें हाटा

कुशीनगर।(राष्ट्र की परम्परा) जनपद के दिव्यांगजनों के लिए राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश शासन…

1 day ago

यात्रियों की सुरक्षा के लिए देवरिया स्टेशन पर चला विशेष चेकिंग अभियान

देवरिया रेलवे स्टेशन पर चला सघन सुरक्षा अभियान, डॉग स्क्वाड व बम निरोधक दस्ते ने…

2 days ago

घर में घुसे जहरीले कोबरा ने ली मासूम की जान, 10 वर्षीय सपना की मौत से गांव में मातम

निचलौल रेफर के बाद जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में तोड़ा दम, रेस्क्यू टीम…

2 days ago

बीबीएयू में राष्ट्रीय मीडिया कार्यशाला, जिम्मेदार पत्रकारिता और फैक्ट-चेकिंग पर दिया गया जोर

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में शनिवार को जनसंचार एवं पत्रकारिता…

3 days ago

भूगोल की पढ़ाई के खुले नए रास्ते, अब किसी भी संकाय के छात्र ले सकेंगे प्रवेश

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की विद्या परिषद ने भूगोल विषय की…

3 days ago

भाजपा नेताओं ने कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का किया भव्य स्वागत

बभनान/बस्ती(राष्ट्र की परम्परा)उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजपा सूर्य प्रताप…

3 days ago