IN–SPACe और ISRO की संयुक्त प्रतियोगिता में उभरे भविष्य के वैज्ञानिक

🌠 कुशीनगर के आसमान में गूंजा “जय विज्ञान” — भारत के युवा वैज्ञानिकों ने मॉडल रॉकेट और कैनसैट से रचा इतिहास!

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा) नारायणी नदी के तट से जब आसमान में रॉकेट ने उड़ान भरी, तो वहां मौजूद हर आंख में चमक और हर दिल में गर्व था। चार दिवसीय इन–स्पेस मॉडल रॉकेट्री और कैनसैट इंडिया स्टूडेंट कंपटीशन 2024–25 का सफल समापन गुरुवार को तमकुहीराज में हुआ, जिसने भारत के युवा वैज्ञानिकों के नवाचार और जिज्ञासा की नई ऊंचाई को परिभाषित किया। यह आयोजन IN–SPACe, ISRO और ASI के संयुक्त तत्वावधान में, उत्तर प्रदेश सरकार और कुशीनगर प्रशासन के सहयोग से सम्पन्न हुआ।
इस राष्ट्रीय फिनाले में देशभर के 67 छात्र दलों — जिनमें 31 मॉडल रॉकेट्री और 36 कैनसैट टीमें शामिल थीं — ने हिस्सा लिया। चार दिनों तक कुशीनगर का आसमान युवा प्रतिभाओं के रॉकेट और कैनसैट लॉन्च से गूंजता रहा। कुल 37 सफल प्रक्षेपण हुए, जिनमें 13 मॉडल रॉकेट्री और 24 कैनसैट लॉन्च शामिल थे।

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कार्यक्रम में IN–SPACe चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका, सांसद शशांक मणि, इस्ट्रैक निदेशक ए.के. अनिल कुमार, और अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
डॉ. गोयनका ने कहा — “यह प्रतियोगिता प्रधानमंत्री के उस विज़न का प्रतीक है, जिसमें भारत के युवा ‘सीखते हुए करने’ की भावना से अंतरिक्ष के भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।”
सांसद शशांक मणि ने कहा, “देवरिया–कुशीनगर की यह धरती अब नवाचार की प्रयोगशाला बन चुकी है। हमारा ‘अमृत प्रयास’ मिशन युवाओं को विज्ञान के नए युग से जोड़ रहा है।”

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वहीं, IN–SPACe के प्रमोशन निदेशक डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि यह आयोजन दिखाता है कि भारत का वैज्ञानिक भविष्य अब हर विद्यालय और हर क्षेत्र में अंकुरित हो रहा है।
बारिश और प्रतिकूल मौसम के बावजूद छात्रों का जोश देखने लायक था। लॉन्च साइट पर उत्साह का माहौल था, जब पैराशूट खुलते ही बच्चे चिल्ला उठे — “देखो, वो रहा हमारा सैटेलाइट!” ग्रामीणों से लेकर वैज्ञानिकों तक, सभी ने इस क्षण को “भारत के अंतरिक्ष नवाचार की जीवंत प्रयोगशाला” कहा।

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विजेता टीमें
👉 मॉडल रॉकेट्री: आर.वी. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (बेंगलुरु), पीएसआईटी (कानपुर), निर्मा यूनिवर्सिटी (अहमदाबाद)


👉 कैनसैट: एसवीकेएम डी.जे. संघवी कॉलेज (मुंबई), दयानंद सागर कॉलेज (बेंगलुरु), बीआईटीएस पिलानी (हैदराबाद)
कार्यक्रम में “आर्ट-इन-स्पेस” प्रतियोगिता और एनालॉग एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग हैबिटेट भी चर्चा का केंद्र रहे, जिनमें छात्रों ने स्पेस मिशन का प्रत्यक्ष अनुभव लिया।
इस आयोजन ने साबित किया कि पूर्वांचल की मिट्टी अब विज्ञान और नवाचार की उड़ान भर रही है। नारायणी नदी का किनारा, जो कभी बाढ़ के लिए जाना जाता था, अब “स्पेस लॉन्च साइट” के रूप में इतिहास में दर्ज हो गया है।
समापन के साथ जब बच्चों की आवाजें गूंजी — “जय भारत, जय विज्ञान!” — तो वह सिर्फ उद्घोष नहीं, बल्कि भारत के नए अंतरिक्ष युग की घोषणा थी।

Editor CP pandey

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