लखनऊ ✍️ राष्ट्र की परम्परा डेस्क। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए चरित्र सत्यापन से जुड़े नियमों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। योगी सरकार ने सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के दौरान अभ्यर्थियों के चरित्र और पुराने रिकॉर्ड की जांच को लेकर नई नीति जारी की है। इसके तहत हिंसक तरीकों से मौजूदा व्यवस्था बदलने के उद्देश्य वाले संगठनों से जुड़े लोगों को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माना जा सकता है। वहीं, पुलिस को चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट निर्धारित 30 दिनों के भीतर देनी होगी।
नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से जारी निर्देश प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती पर लागू होंगे। इस फैसले के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया और उसके मानकों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
केवल राजनीतिक विचारधारा या FIR से नहीं कटेगा नौकरी का रास्ता
नई नीति में एक महत्वपूर्ण बात यह भी स्पष्ट की गई है कि किसी अभ्यर्थी को सिर्फ उसकी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। इसी तरह, केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने से भी अभ्यर्थी स्वतः नौकरी के लिए अयोग्य नहीं हो जाएगा। मामले की प्रकृति, लागू नियमों और सत्यापन में सामने आए तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
हालांकि, ऐसे संगठन से जुड़ाव, जिसका घोषित उद्देश्य हिंसक तरीके से मौजूदा सामाजिक व्यवस्था को बदलना हो, पात्रता के लिहाज से गंभीर माना जा सकता है। निर्देशों में 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद सत्यापन की तारीख से पिछले तीन वर्षों के दौरान ऐसी गतिविधियों में भागीदारी को भी महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। परिस्थितियों के अनुसार, व्यवहार में सकारात्मक बदलाव के ठोस प्रमाणों पर भी विचार किया जा सकता है।
30 दिन में रिपोर्ट, अभ्यर्थियों को भी मिलेगा पक्ष रखने का अवसर
नई व्यवस्था के तहत जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) को सत्यापन का अनुरोध मिलने के 30 दिनों के भीतर संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी को रिपोर्ट देनी होगी। रिपोर्ट में प्रतिकूल तथ्य सामने आने पर अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने का अवसर देने का भी प्रावधान है। इससे किसी उम्मीदवार के भविष्य पर फैसला करने से पहले संबंधित तथ्यों और उसके स्पष्टीकरण पर विचार किया जा सकेगा।
सत्यापन लंबित होने पर भी मिल सकता है नियुक्ति पत्र
नई नीति के अनुसार, चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने में देरी होने मात्र से नियुक्ति पत्र जारी करना अनिवार्य रूप से रोकना जरूरी नहीं होगा। निर्धारित स्व-घोषणा और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर औपबंधिक नियुक्ति पत्र दिया जा सकता है। हालांकि, बाद में अभ्यर्थी के अयोग्य पाए जाने या आवेदन में जानबूझकर गलत जानकारी देने की स्थिति में नियुक्ति रद्द करने और कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।
पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का नए सिरे से चरित्र सत्यापन अनिवार्य नहीं होगा। जरूरत पड़ने पर उनके पिछले विभाग से संबंधित जानकारी मांगी जा सकती है।
युवाओं के मन में सबसे बड़ा सवाल
सरकारी नौकरी के लिए मेहनत कर रहे युवाओं के लिए इस नीति का सबसे अहम पहलू यह है कि चरित्र सत्यापन में किसी गतिविधि की प्रकृति, प्रमाण और अभ्यर्थी की वास्तविक भूमिका का आकलन किस तरह किया जाएगा। साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि किसी निर्दोष व्यक्ति को केवल आरोपों या गलत रिपोर्ट के आधार पर नुकसान न उठाना पड़े।
नई व्यवस्था का उद्देश्य जहां भर्ती प्रक्रिया में सत्यापन को स्पष्ट और समयबद्ध बनाना है, वहीं इसके निष्पक्ष क्रियान्वयन और अभ्यर्थियों को उचित सुनवाई मिलने पर भी नजर रहेगी। अब देखना होगा कि इन निर्देशों को जमीनी स्तर पर किस तरह लागू किया जाता है और चरित्र सत्यापन के मामलों में पारदर्शिता कितनी सुनिश्चित हो पाती है।
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