पिपराघाट जीरो बंधा पर गूंजेगी रॉकेट लॉन्चिंग की गूंज
पांच लॉन्चर और 59 कैनसैट की ड्रोन से लॉन्चिंग की तैयारी; 608 विद्यार्थी और 150 शिक्षक होंगे शामिल
कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। नारायणी नदी के तट पर बसे पिपराघाट जीरो बंधा पर जल्द ही विज्ञान और अंतरिक्ष तकनीक का अनोखा नजारा देखने को मिलेगा। तमकुहीराज क्षेत्र में 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक आयोजित होने जा रहे नारायणी रॉकेट्री कप-2026 में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका 1 नवंबर को शामिल होंगे। देशभर से पहुंचने वाली छात्र टीमें मॉडल रॉकेट्री और कैनसैट के माध्यम से अपनी तकनीकी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी। आयोजन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं और लॉन्च पैड से लेकर कंट्रोल रूम तक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
यह आयोजन सिर्फ रॉकेट उड़ाने और तकनीकी कौशल दिखाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान को गांवों और किसानों की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल फसलों की निगरानी, कृषि बीमा से संबंधित आकलन और ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति समझने में किया जा सकता है। ग्राम प्रधानों को भी अंतरिक्ष आधारित तकनीक की मदद से गांवों की जरूरतों और विकास कार्यों की बेहतर योजना बनाने में सहायता मिल सकती है।
सांसद शशांक मणि की दस वर्षीय विकास रणनीति ‘अमृत प्रयास’ के तहत श्रीनारायणी साइंस डेवलपमेंट फाउंडेशन (एसएसडीएफ) के संयोजन में आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, उद्यमिता और जनभागीदारी को बढ़ावा देना है। इसके जरिए देवरिया लोकसभा क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक गतिविधियों से जोड़ने और युवाओं में नवाचार की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रतियोगिता में कुल 76 छात्र टीमें भाग लेंगी। इनमें 28 टीमें मॉडल रॉकेट्री और 48 टीमें कैनसैट श्रेणी की हैं। आयोजकों के अनुमान के मुताबिक, करीब 608 विद्यार्थी तथा 150 शिक्षक और मेंटर्स इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। विद्यार्थियों को रॉकेट डिजाइन, पेलोड, तकनीकी संयोजन और प्रक्षेपण से जुड़ी प्रक्रियाओं को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
सांसद शशांक मणि ने कहा कि 1 नवंबर को IN-SPACe के चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका की उपस्थिति से विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और रॉकेट तकनीक को समझने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रयास है कि अंतरिक्ष तकनीक का लाभ केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि किसान और ग्रामीण क्षेत्र भी इससे लाभान्वित हों। कृषि बीमा, फसलों की निगरानी और ग्रामीण विकास में अंतरिक्ष आधारित सेवाओं के इस्तेमाल की संभावनाओं को आगे बढ़ाना इस पहल का अहम उद्देश्य है।
उधर, आयोजन स्थल पर तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। पिपराघाट जीरो बंधा स्थित लॉन्च पैड तक जाने वाली सड़क की मरम्मत कराई जा रही है। रॉकेट प्रक्षेपण के लिए पांच लॉन्चर लगाए जा रहे हैं, जबकि 31 अक्टूबर को ग्राउंड टेस्ट निर्धारित किया गया है। थ्रस्ट टेक इंडिया की टीम लॉन्चरों को स्थापित करने में जुटी है। आयोजकों का लक्ष्य है कि तय समय से पहले तकनीकी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं, ताकि प्रतियोगिता के दौरान प्रक्षेपण से जुड़ी गतिविधियां व्यवस्थित तरीके से संचालित हो सकें।
इस बार प्रतियोगिता में 59 कैनसैट की लॉन्चिंग ड्रोन के माध्यम से की जाएगी, जबकि 28 मॉडल रॉकेट लॉन्च पैड से प्रक्षेपित किए जाएंगे। कैनसैट की तैयारी और ड्रोन पर उसकी तकनीकी असेंबलिंग के लिए नेशनल एयरोनॉटिकल लैबोरेटरी (एनएएल) की टीम की भूमिका रहेगी। इस तकनीकी व्यवस्था के जरिए विद्यार्थियों को छोटे उपग्रहों जैसी संरचनाओं और उनसे जुड़ी प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
लॉन्च पैड की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए ऑब्जर्वेशन प्वाइंट के पास कंट्रोल रूम तैयार किया जा रहा है। यहां लगभग 50 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी। बड़ी एलईडी स्क्रीन के माध्यम से लॉन्च पैड पर होने वाली गतिविधियों को देखा जा सकेगा। जूरी सदस्यों, फैकल्टी और तकनीकी टीमों के लिए भी जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
दर्शकों और अतिथियों के लिए भी खास इंतजाम किए जा रहे हैं। ऑब्जर्वेशन एरिया के पास विशाल जर्मन हैंगर लगाया जा रहा है, जहां रॉकेट असेंबलिंग, अतिथियों के संबोधन और विजेताओं की घोषणा जैसे कार्यक्रम होंगे। इसके निकट पांच पगोडा बनाए जा रहे हैं, जिन्हें जूरी सदस्यों, थ्रस्ट टेक इंडिया और प्लेनेटोरियम से जुड़ी टीमों के लिए आरक्षित रखा जाएगा।
आयोजन को विद्यार्थियों और आम लोगों के लिए और आकर्षक बनाने के उद्देश्य से प्रवेश द्वार के पास विजिटर गैलरी भी बनाई जा रही है। यहां जगदीश पब्लिक स्कूल और द प्रेसिडेंट स्कूल, तमकुही के विद्यार्थी मॉडल रॉकेट और पेंटिंग की प्रदर्शनी लगाएंगे। इससे छात्र अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित कर सकेंगे और आगंतुकों को विज्ञान के प्रति बच्चों की रुचि देखने का मौका मिलेगा। ऑब्जर्वेशन प्वाइंट से लगभग 100 मीटर और 500 मीटर की दूरी पर पार्किंग की व्यवस्था भी की जा रही है।
एसएसडीएफ के निदेशक मनीष बजाज के अनुसार, प्रतियोगिता में 59 कैनसैट को ड्रोन के जरिए लॉन्च करने की तैयारी है। इसके लिए एनएएल की टीम तकनीकी असेंबलिंग करेगी। वहीं, 28 मॉडल रॉकेट के प्रक्षेपण के लिए पांच लॉन्चर लगाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यह आयोजन विद्यार्थियों को अंतरिक्ष तकनीक की व्यावहारिक प्रक्रियाओं से परिचित कराने और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का अवसर बनेगा।
नारायणी नदी के तट पर आयोजित होने वाला यह राष्ट्रीय कार्यक्रम कुशीनगर और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए विज्ञान की दुनिया से जुड़ने का बड़ा मंच बन सकता है। अब निगाहें 31 अक्टूबर को होने वाले ग्राउंड टेस्ट और 1 नवंबर को डॉ. पवन गोयनका के आगमन पर टिकी हैं। यदि सभी तैयारियां तय योजना के अनुसार पूरी होती हैं, तो पिपराघाट जीरो बंधा पर रॉकेट्री और कैनसैट की गतिविधियां विद्यार्थियों के लिए यादगार अनुभव साबित होंगी।
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