Wednesday, February 25, 2026
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देवहुति संवाद व ध्रुव चरित्र के माध्यम से बताया सत्संग का महत्व

सती प्रसंग सुन द्रवित हो उठे श्रद्धालु

कुशीनगर(राष्ट्र की परम्परा)l पडरौना के तुलसी आवास विकास कालोनी फेज टू गोस्वामी तुलसीदास पार्क में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत पुराण कथा यज्ञ के तीसरे दिन वृन्दावन से पधारे कथावाचक आचार्य सुदामा जी महाराज ने श्रद्धालुओं को सती चरित्र, ध्रुव चरित्र व कपिल अवतार आदि प्रसंगों की कथा सुनाई।
शनिवार की सायं कपिल देवहूती प्रसंग के माध्यम से कथा सुनाते हुए कथावाचक ने संतो के संगति के महत्व पर प्रकाश डाला। बताया कि भगवान विष्णु ने पांचवा अवतार कपिल मुनि के रूप में लिया। इनके पिता का नाम महर्षि कर्दम व माता का नाम देवहूति था। शरशय्या पर पड़े हुए भीष्म पितामह के शरीर त्याग के समय वेदज्ञ व्यास आदि ऋषियों के साथ भगवान कपिल मुनि जी भी वहां उपस्थित थे। भगवान कपिल मुनि जी सांख्य दर्शन के प्रवर्तक हैं। श्री गुरू भगवान कपिल महामुनि जी भागवत धर्म के प्रमुख बारह आचार्यों में से एक हैं। कथावाचक ने कहा कि ध्रुव चरित्र की कथा से यह सिद्ध हो जाता है कि भगवत प्राप्ति के लिए उम्र की नहीं बल्कि निष्ठा की जरूरत है। उन्होंने बताया कि भगवान शिव की अनुमति लिए बिना उमा अपने पिता दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में भाग लेने पहुंच गईं। यज्ञ में भगवान शिव का आमंत्रण और उनका भाग न दिए जाने पर कुपित होकर सती ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर शरीर त्याग दिया। पं. दिनेश त्रिपाठी व नवनीत पांडेय ने मूल परायण पाठ किया। संगीतमई कथा में सुदेश मिश्र, विनय शर्मा व विनीत त्रिवेदी आदि कलाकारों ने संगीत पर संगत की। मुख्य यजमान दिवाकर मिश्र, मंजू मिश्र, मनोज कुमार पांडेय, कृष्ण मोहन मिश्र, सुनील कुमार मिश्र, आलोक कुमार मिश्र, पंकज कुमार मिश्र, नीलिमा, अवि, सूरज, अतुल, ऋद्धिमा, कौस्तुभ, परिणिति, पायल,
संजय चौबे, तेज प्रताप सिंह आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।

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