डिजिटल क्रांति का असर: इंटरनेट से सशक्त हुए गांव, पंचायतें बनीं ई-गवर्नेंस की मिसाल

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत का ग्रामीण परिदृश्य अब तकनीक और इंटरनेट की ताकत से पूरी तरह बदल रहा है। कभी सूचना और सेवाओं से वंचित रहने वाले गांव अब डिजिटल इंडिया मिशन की वजह से प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय सेवाओं से सीधे जुड़े हुए हैं। ग्राम पंचायतें अब केवल स्थानीय शासन की इकाई नहीं रह गईं, बल्कि ई-गवर्नेंस और पारदर्शिता की मिसाल बन चुकी हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के 6.44 लाख गांवों में से 6.26 लाख गांव इंटरनेट नेटवर्क से जुड़ चुके हैं। भारतनेट के तहत अब तक 13 लाख से अधिक फाइबर टू द होम (FTTH) कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जिससे ग्रामीण भारत में योजना निर्माण से लेकर भुगतान तक की प्रक्रियाएं पूरी तरह ऑनलाइन संभव हो गई हैं।

पंचायतों की डिजिटल उपलब्धियाँ

अब तक 2.68 लाख पंचायतें, जो देश की लगभग 70% आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं, ऑनलाइन प्रणाली से जुड़ चुकी हैं।

2.63 करोड़ संपत्तियां डिजिटल रूप से दर्ज हो चुकी हैं और 3.5 लाख गांवों का ड्रोन सर्वेक्षण संपन्न हो चुका है।

2.54 लाख ग्राम पंचायतें अपनी विकास योजनाएं ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड कर चुकी हैं।

2.41 लाख पंचायतें वित्तीय लेन-देन और अनुदान राशि का पूरा उपयोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से कर रही हैं।

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नई तकनीक से बढ़ा पारदर्शी शासन

पंचायतों की बैठकों को अब एआई आधारित रिकॉर्डिंग सिस्टम के जरिए 14 भाषाओं में दर्ज और अपलोड किया जा रहा है।

मेरी पंचायत एप, सभागार एप और निर्णय पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म संपत्ति प्रबंधन, बजट निगरानी और नागरिक सेवाओं को आसान बना रहे हैं।

भू-स्थानिक नियोजन और मोबाइल ऐप आधारित सेवाएँ ग्रामीण विकास की रफ्तार को और तेज कर रही हैं।

भारतनेट से शुरू होकर ड्रोन तक पहुँचा बदलाव

2011 में शुरू हुई भारतनेट परियोजना ने ग्रामीण भारत में इंटरनेट की नींव रखी। 2014 के बाद इस पहल को नई गति मिली और आज इसका प्रभाव साफ दिखाई देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल अप्रैल में डिजिटल संपत्ति सर्वेक्षण योजना की शुरुआत की, जिसके तहत नागरिक अब घर और जमीन का स्वामित्व प्रमाणपत्र ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं। ड्रोन तकनीक और डिजिटल मानचित्रण ने दशकों से चली आ रही पटवारी पर निर्भरता खत्म कर दी है।

डिजिटल इंडिया अभियान ने ग्रामीण भारत को न सिर्फ इंटरनेट से जोड़ा है, बल्कि लोकतंत्र को और मजबूत बनाया है। ई-गवर्नेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म और पारदर्शी व्यवस्थाओं ने पंचायतों को तकनीकी रूप से सशक्त करते हुए विकास की दिशा में नए आयाम स्थापित किए हैं।

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Karan Pandey

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