देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)
जनपद देवरिया में चर्चित कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव निलंबन मामले में उत्तर प्रदेश शासन ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
यह कार्रवाई जिलाधिकारी की संस्तुति के आधार पर की गई है। शासन ने न केवल निलंबन आदेश जारी किया, बल्कि विभागीय अनुशासनिक जांच भी संस्थित कर दी है। इस निर्णय के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक हलकों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
डीएम की संस्तुति पर हुई कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, 23 फरवरी 2026 को दिव्या मित्तल द्वारा शासन को भेजी गई संस्तुति में संबंधित प्रकरण में लापरवाही और आदेशों के अनुपालन में शिथिलता की बात कही गई थी।
इसी संस्तुति के आधार पर शासन स्तर पर परीक्षण किया गया, जिसके बाद देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव निलंबन का निर्णय लिया गया।
उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में शिथिलता का आरोप
उत्तर प्रदेश शासन, बेसिक शिक्षा अनुभाग-1 द्वारा जारी कार्यालय आदेश में उल्लेख किया गया है कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में शिथिलता बरती गई। लगभग एक वर्ष तक प्रभावी कार्रवाई न किए जाने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।
शासन ने इसे शासकीय दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता और लापरवाही की श्रेणी में माना है, जो गंभीर कदाचार के अंतर्गत आता है।
देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव निलंबन इसी आधार पर किया गया है।
नियम-4 के तहत निलंबन, नियम-7 के तहत जांच
शासनादेश के अनुसार शालिनी श्रीवास्तव को उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के नियम-4 के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
साथ ही नियम-7 के अंतर्गत विभागीय जांच संस्थित की गई है।
जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
निलंबन अवधि में मिलेगा जीवन निर्वाह भत्ता
शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान संबंधित अधिकारी को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
साथ ही उनका संबद्धीकरण शिक्षा निदेशक (बेसिक) उत्तर प्रदेश कार्यालय, लखनऊ से किया गया है।
देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव निलंबन के बाद यह व्यवस्था प्रशासनिक औपचारिकताओं के तहत की गई है।
अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का पद रिक्त होने के कारण शासन ने शैक्षिक और प्रशासनिक कार्यों में व्यवधान न आए, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है।
तत्काल प्रभाव से डायट देवरिया के प्राचार्य को उनके वर्तमान पद के साथ-साथ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, देवरिया का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
यह आदेश नियमित तैनाती होने तक प्रभावी रहेगा।
पहले भी हुई थी कार्रवाई
उल्लेखनीय है कि कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में परिजनों की तहरीर पर थाना गुलहरिया में नामजद मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।
इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आरोपित पटल सहायक को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
अब देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव निलंबन के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर
जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया है कि जनपद में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव निलंबन इसी सख्त प्रशासनिक नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
शिक्षा विभाग में हलचल
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच यह संदेश स्पष्ट गया है कि उच्च न्यायालय के आदेशों और शासन निर्देशों की अनदेखी गंभीर परिणाम ला सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम विभागीय अनुशासन को मजबूत करेगा और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक होगा।
आगे क्या?
अब निगाहें विभागीय जांच की प्रक्रिया पर टिकी हैं। जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो सेवा नियमावली के तहत और कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है।
देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव निलंबन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शासन प्रशासनिक जवाबदेही के मामले में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा।
