Categories: लेख

मानदेय अटका, घरों में चूल्हा ठंडा: ग्राम रोजगार सेवकों पर रोज़ी-रोटी का संकट

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की रीढ़ माने जाने वाले ग्राम रोजगार सेवक आज खुद जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं। जुलाई माह से अब तक मानदेय का भुगतान न होने के कारण सैकड़ों रोजगार सेवकों के सामने रोज़ी-रोटी का गहरा संकट खड़ा हो गया है। महीनों से बिना वेतन काम कर रहे इन कर्मियों के घरों में आर्थिक तंगी इस कदर बढ़ गई है कि बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना दूभर हो गया है। मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना के सफल क्रियान्वयन में ग्राम रोजगार सेवकों की भूमिका बेहद अहम है। योजना की जमीनी हकीकत यही ग्राम रोजगार सेवक तय करते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इन्हीं की अनदेखी सबसे ज्यादा हो रही है। सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलकर नए नामकरण की कवायद तेज है और इसके जरिए कार्यों में तेजी लाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन योजना को धरातल पर उतारने वाले रोजगार सेवकों के हितों पर कोई ठोस बात सामने नहीं आई है।रोजगार सेवकों का कहना है कि काम से जुड़ा ऐप तो नियमित रूप से चलता है, हाजिरी और प्रगति रिपोर्ट समय पर अपलोड होती है, लेकिन उनके यूएन खाते में मानदेय और उससे कटी ईपीएफ की धनराशि जमा नहीं हो रही है। यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है और कर्मचारियों का मनोबल तोड़ने वाली है।वर्तमान में ग्राम रोजगार सेवकों को मात्र 7,788 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है, जो महंगाई के इस दौर में ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। रोजगार सेवकों की मांग है कि नाम बदलने के साथ-साथ उन्हें समय पर भुगतान, बुनियादी सुविधाएं और स्थायी वेतनमान भी दिया जाए। यदि सरकार वास्तव में ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है, तो ग्राम रोजगार सेवकों को नियमित कर सम्मानजनक वेतनमान देना होगा। अन्यथा नए नामकरण के शोर के बीच रोजगार सेवकों के सामने रोजगार और सम्मान दोनों का संकट यूं ही बना रहेगा। इस संबंध में उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ महराजगंज के जिला अध्यक्ष/ प्रांतीय उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद ने कहा कि भारत सरकार मनरेगा का नाम बदलकर जी राम जी रखकर कुछ परिवर्तन कर रही है। श्रमिकों को 125 दिन की रोजगार देने की बात कर रही है किन्तु इस योजना को धरातल पर उतरने वाले ग्राम रोजगार सेवक व अन्य मनरेगा कर्मियों का मानदेय समय से भुगतान हो, इनके नियमितीकरण के लिए एक्ट में कोई व्यवस्था नहीं कर रही है। लगभग 18 वर्षों से कार्यरत ग्राम रोजगार सेवक सहित अन्य मनरेगा कर्मियों का भविष्य सुदृढ़ करने के लिए सरकार को उनके नियमितीकरण व वेतनमान की व्यवस्था करनी चाहिए।

rkpnews@desk

Recent Posts

तेल से पानी तक जंग का विस्तार: ईरान-इज़रायल संघर्ष ने बदली युद्ध की परिभाषा

वैश्विक ऊर्जा इमरजेंसी-तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत में ही दुनियाँ पर पड़ा असर-जंग का बदलता…

4 hours ago

गोरखपुर में फॉरेंसिक रिसर्च सेंटर का भूमि पूजन

सीएम योगी की चुटकी से गरमाई सियासत महिला प्रत्याशी को लेकर चर्चा तेज गोरखपुर(राष्ट्र की…

6 hours ago

स्ट्रीट लाइट खरीद में घोटाला, ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के मिठौरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपरा सोंनाड़ी में विकास…

7 hours ago

निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में 200 मरीजों का हुआ उपचार

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l स्थानीय तहसील क्षेत्र के ग्राम मिर्जापुर के पंचायत भवन में बुधवार…

7 hours ago

राम नवमी अवकाश में बदलाव: 26 मार्च को खुलेंगे न्यायालय, 27 मार्च को रहेगा अवकाश

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जिला न्यायालय महराजगंज में राम नवमी के अवकाश को लेकर प्रशासन ने…

7 hours ago

निजी स्कूलों की महंगी फीस, बड़े दावे और हकीकत

चमकदार विज्ञापन बनाम वास्तविक परिणाम: निजी स्कूलों की पड़ताल (विज्ञापनों में सफलता की गारंटी, लेकिन…

8 hours ago