योजना जमीन पर दौड़ रही, कर्मचारी आर्थिक बदहाली में—ग्राम रोजगार सेवकों का फूटा आक्रोश
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन की रीढ़ मानी जाने वाली मनरेगा (अब वीबी जीरामजी योजना) भले ही कागजों और सरकारी रिपोर्टों में सफल दिखाई दे रही हो, लेकिन इस योजना को धरातल पर लागू करने वाले ग्राम रोजगार सेवक खुद गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। पिछले छह माह से मानदेय बकाया रहने को लेकर शुक्रवार को विकास खण्ड सदर परिसर में उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ की आवश्यक बैठक में शासन और प्रशासन के खिलाफ तीखा आक्रोश देखने को मिला।
बैठक की अध्यक्षता संघ के जिलाध्यक्ष एवं प्रांतीय उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद ने की। उन्होंने कहा कि जब सरकार रोजगार, पारदर्शिता और सुशासन की बात करती है, तो फिर योजना को लागू करने वाले कर्मचारियों को महीनों तक मानदेय से वंचित रखना किस नीति का हिस्सा है। यह स्थिति प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाती है।
नाम बदला, व्यवस्था नहीं—कर्मचारी उपेक्षित
बैठक में स्पष्ट किया गया कि मनरेगा का नाम बदलकर वीबी जीरामजी किए जाने पर संगठन को आपत्ति नहीं है, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि केवल नाम बदलने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती। नई योजना लागू करते समय न तो ग्राम रोजगार सेवकों के मानदेय, न कार्यभार और न ही भविष्य की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस नीति बनाई गई।
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मानदेय न मिलने से कई कर्मचारियों पर कर्ज का बोझ बढ़ गया है। बच्चों की पढ़ाई, इलाज, किराया, बिजली-पानी के बिल और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से न कोई स्पष्ट जवाब मिला और न ही कोई ठोस आश्वासन।
18 वर्षों की सेवा, फिर भी अस्थायी दर्जा
बैठक में नियमितीकरण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। ग्राम रोजगार सेवकों ने बताया कि कई कर्मचारी 18 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे हैं। पंचायत स्तर पर योजना क्रियान्वयन, ऑनलाइन फीडिंग, मजदूर सत्यापन और रिपोर्टिंग जैसी अहम जिम्मेदारियों के बावजूद उन्हें आज भी अस्थायी कर्मचारी माना जाता है। संगठन ने इसे श्रम शोषण बताते हुए सरकार की श्रम हितैषी छवि पर सवाल खड़े किए।
प्रमुख मांगें
बैठक में निम्न मांगें रखी गईं—
• छह माह का बकाया मानदेय तत्काल जारी किया जाए
• ग्राम रोजगार सेवकों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की जाए
• हर माह निश्चित तिथि पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए
• नई योजना में पूर्व की सकारात्मक नीतियों को शामिल किया जाए
• वर्षों से कार्यरत ग्राम रोजगार सेवकों का नियमितीकरण किया जाए
संघ ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो जिला से प्रदेश स्तर तक धरना-प्रदर्शन, कार्य बहिष्कार और आंदोलन किया जाएगा। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ने वाले प्रभाव की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
बैठक में प्रवीण मणि त्रिपाठी, इंद्रविजय यादव, बंधु मद्धेशिया, अमित पटेल, घनश्याम, राम आशीष पटेल, राहुल कुमार गुप्ता, ए.के. चंद्रा, राजेश जायसवाल, संतोष कुमार गुप्ता, धर्मेंद्र, इंद्रमणि विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्राम रोजगार सेवक उपस्थित रहे।
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