माता-पिता के संस्कार और गांव के संकल्प से रचा इतिहास: दरौली के सूरज जायसवाल बने एमबीबीएस

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद महराजगंज की ग्राम सभा दरौली के लिए यह क्षण गर्व, हर्ष और प्रेरणा से भरा है। गांव के होनहार युवक सूरज जायसवाल ने महज 27 वर्ष की उम्र में एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर न सिर्फ अपने माता-पिता और परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच अडिग संकल्प, सतत परिश्रम और सामूहिक सहयोग से मिली यह सफलता आज दरौली की पहचान बन गई है।
सूरज जायसवाल, पुत्र राधारमण जायसवाल, ग्राम पंचायत दरौली के मूल निवासी हैं। उन्होंने सेमी मेडिकल यूनिवर्सिटी, कज़ाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और तत्पश्चात भारत में स्क्रीनिंग परीक्षा उत्तीर्ण कर यह सिद्ध किया कि प्रतिभा अवसर की मोहताज नहीं होती—उसे दिशा, अनुशासन और विश्वास चाहिए।
अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय देते हुए सूरज ने भावुक स्वर में कहा कि उनकी इस यात्रा में माता मीरा जायसवाल, पिता राधारमण जायसवाल, चाचा घनश्याम जायसवाल, चाची रीता जायसवाल, बहन खुशबू जायसवाल सहित पूरे परिवार और ग्रामवासियों का नैतिक, भावनात्मक और आर्थिक सहयोग निर्णायक रहा।
उन्होंने कहा, यदि परिवार का भरोसा और गांव का आशीर्वाद न होता, तो यह मुकाम संभव नहीं था। हर कठिन मोड़ पर मेरे घर के लोगों ने तन-मन-धन से मेरा साथ दिया और मेरा मनोबल बढ़ाया।
एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त करने के बाद सूरज जायसवाल ने समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल डॉक्टर बनना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को दूर करने की दिशा में काम करने की इच्छा जताई।
सूरज की सफलता से दरौली सहित आस-पास के गांवों में उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि सूरज आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा-स्तंभ हैं। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि दृढ़ निश्चय, अनुशासन और सामूहिक सहयोग से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। गांव के युवाओं में शिक्षा के प्रति नई ऊर्जा और विश्वास जागृत हुआ है।
दरौली का यह बेटा आज पूरे महराजगंज की शान बन गया है—एक ऐसा उदाहरण, जो बताता है कि संस्कार, संघर्ष और सहयोग मिलकर इतिहास रचते हैं।

rkpnews@somnath

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