Tuesday, January 13, 2026
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बांग्लादेश में हिंदू व्यापारी को जिंदा जलाने की कोशिश, पत्नी बोली – ‘हमारा किसी से कोई विवाद नहीं था

ढाका (राष्ट्र की परम्परा)। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर बढ़ते हमलों के बीच एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। राजधानी ढाका से करीब 150 किलोमीटर दूर एक गांव में हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास पर धारदार हथियारों से हमला कर उनके ऊपर पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की कोशिश की गई। गंभीर रूप से झुलसे खोकन दास फिलहाल ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

पत्नी सीमा दास का दर्द

पीड़ित की पत्नी सीमा दास ने बताया कि उनके पति का किसी से कोई विवाद नहीं था। उन्होंने कहा,
“हमें समझ नहीं आ रहा कि मेरे पति को इतनी बेरहमी से क्यों निशाना बनाया गया। हमारा किसी से कोई झगड़ा नहीं था।”

सीमा दास ने आशंका जताई कि यह हमला धार्मिक पहचान के कारण किया गया। उन्होंने कहा कि हमलावर मुस्लिम थे और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

पहचान हो जाने पर जिंदा जलाने की कोशिश

सीमा दास के अनुसार, अस्पताल में भर्ती खोकन दास ने दो हमलावरों की पहचान कर ली थी। इसी वजह से आरोपियों ने उनके सिर और चेहरे पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी, ताकि उनकी जान ली जा सके।

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क्या करते थे खोकन दास?

खोकन दास अपने गांव में दवा की दुकान और मोबाइल बैंकिंग का व्यवसाय चलाते थे। बुधवार को दुकान बंद कर घर लौटते समय उन पर हमला किया गया। आग लगने के बाद वह किसी तरह पास के तालाब में कूद गए, जिससे आग बुझ गई और उनकी जान बच सकी। इसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

खोकन और सीमा दास के तीन बच्चे हैं। परिवार के अनुसार, खोकन दास का काफी खून बह चुका है और उनकी हालत स्थिर करने के लिए कम से कम छह यूनिट खून की जरूरत है। अस्पताल में सीमा दास अपने सबसे छोटे बेटे को सीने से लगाए हुए इंसाफ की गुहार लगाती दिखीं।

अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा, भारत ने जताई चिंता

मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हिंसा बढ़ने के आरोप लग रहे हैं। भारत समेत कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने इस पर गंभीर चिंता जताई है।
हाल ही में भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार जारी हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि वह हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है। वहीं, बांग्लादेश सरकार का दावा है कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

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