चरण स्पर्श से ऊँचा हृदय में
मान सम्मान व प्रेम होता है,
किसी को प्रणाम करने से
उसका आशीर्वाद मिलता है।
जो भी अच्छा करता है इंसान,
वही तो उसे वापस मिलता है,
मान करता है कोई किसी का,
उसको भी सम्मान मिलता है।
सदा सुखी रहो यह हृदय के
अंतस से ही कहा जाता है,
अपनो को ही नहीं, ग़ैरों को भी
सादर प्रणाम कहा जाता है।
स्त्री पुरुष सभी का हृदय में,
मान – सम्मान होना चाहिए,
बड़ों को सादर प्रणाम छोटों
को आशीर्वाद देना चाहिये।
यही है रीति भारत वर्ष की
और यही सद्यः सनातन है,
बड़ों को सादर प्रणाम व छोटों
को आदित्य का आशीर्वचन है।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ
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