लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा) उत्तर प्रदेश में दाखिल-खारिज (नामांतरण) मामलों में लगातार हो रही देरी पर अब न्यायपालिका ने सख्त रुख अपना लिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश देते हुए कहा है कि गैर-विवादित मामलों में अधिकतम 45 दिन के भीतर नामांतरण की प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए। वहीं, विवादित मामलों में 90 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाना अनिवार्य होगा।
हाईकोर्ट ने इस संबंध में साफ चेतावनी दी है कि यदि निर्दिष्ट समयसीमा के भीतर कार्यवाही पूरी नहीं होती है, तो इसके लिए जिला अधिकारी (DM) और कमिश्नर को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दाखिल-खारिज जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में अनावश्यक देरी आम नागरिकों को परेशान करती है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था की साख पर भी सवाल उठते हैं।
गैर-विवादित मामलों में 45 दिन में नामांतरण अनिवार्य।,विवादित मामलों का निपटारा 90 दिनों के भीतर।समयसीमा का पालन न करने पर डीएम और कमिश्नर पर तय होगी जवाबदेही।राजस्व विभाग को भी निर्देशित किया गया कि प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।
हाईकोर्ट के इस आदेश को जनता के हित में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे आम नागरिकों को जमीन-जायदाद के दस्तावेजों के नामांतरण में हो रही बेवजह की देरी से राहत मिलेगी। साथ ही प्रशासनिक जवाबदेही भी तय होगी।
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