मेरे राम को भजने वाले,
क्यों न सामने आते हो।
प्रभू मुद्रिका लाने वाले,
तुम छिपके कहाँ बैठे हो।
माता मैं बजरंगबली हूँ,
प्रभू राम का सेवक हूँ,
हनूमान है नाम हमारा,
अशोक वाटिका में आया हूँ।
श्रीराम के चाहने वाले,
राम दूत बन आये हो,
मेरे राम को भजने वाले,
क्यों न सामने आते हो।
हाथ जोड़ प्रकटे हनुमंता,
मातु प्रणाम करूँ तुमको,
राम भक्त हूँ परम सनेही,
माँ तुम्हे खोजते आया हूँ,
कहो वत्स स्वामी कैसे हैं,
कैसे अनुज लक्ष्मण हैं,
कुशल क्षेम उनकी अब दे दो,
क्यों विलंब तुम करते हो,
मेरे राम को भजने वाले,
क्यों न सामने आते हो।
प्रभू हमारे तो सकुशल हैं,
सकुशल भ्राता लक्ष्मण हैं,
दुःखी आपके दुख से दोऊ,
तुम्हें याद कर रोते हैं,
प्रभू शीघ्र लेने आयेंगे,
तुम्हें छुड़ा ले जाएँगे,
निसिचर वंश का नाश करेंगे,
इस धरती का भार हरेंगे,
संग तुम्हें ले जाऊँ कैसे,
जब प्रभु का आदेश नहीं हो।
मेरे राम को भजने वाले,
क्यों न सामने आते हो।
मातु धरो बस कुछ दिन धीरज,
रावण का विनाश होगा,
कोई निशानी दे दो अपनी,
प्रभू के लिये ले जाऊँगा,
चूड़ामणि दे दिया सिया ने,
चरण कमल बंदे हनुमत ने,
आदित्य विनय कर देना प्रभु से,
आने में अब और विलंब न हो,
मेरे राम को भजने वाले,
क्यों न सामने आते हो।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
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