Saturday, February 14, 2026
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आधा-अधूरा इंटरलॉकिंग, लाखों का भुगतान

बड़हरा राजा में इंटरलॉकिंग घोटाले’ की गूंज, ग्रामीणों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। सदर ब्लाक की ग्राम पंचायत बड़हरा राजा में इंटरलॉकिंग निर्माण कार्य को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आधा-अधूरा कार्य होने के बावजूद लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया है। मामले ने तूल पकड़ लिया है और गांव में इसे लेकर आक्रोश व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बालकेश के घर से पूरब पलटू के घर होते हुए दक्षिण में उपेंद्र की झोपड़ी तक कराए गए इंटरलॉकिंग कार्य की गुणवत्ता और चौड़ाई पर गंभीर सवाल हैं। कहीं सड़क की चौड़ाई एक मीटर, कहीं आधा मीटर तो कहीं दो से तीन मीटर तक बताई जा रही है। आरोप है कि स्वीकृत बजट और स्टीमेट के विपरीत कार्य किया गया, जबकि कागजों में पूरी राशि खर्च दर्शा दी गई।
ग्रामीणों का दावा है कि इस मार्ग पर दुर्गा ट्रेडिंग कंपनी के नाम से बड़ी धनराशि निकाली गई। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार 31 जनवरी 2026 को पंचम राज्य वित्त से ₹1,49,968 मजदूरों के नाम पर तथा पंद्रहवीं राज्य वित्त से ₹31,800 का भुगतान दर्शाया गया। इसके बाद 13 फरवरी 2026 को पुनः ₹1,20,368 की धनराशि निकासी का उल्लेख है। कुल मिलाकर तीन किश्तों में लाखों रुपये का भुगतान दिखाया गया है, जबकि मौके पर कार्य अधूरा बताया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि मार्ग की अनुमानित लागत से अधिक खर्च दर्शाकर भुगतान कराया गया। कई स्थानों पर इंटरलॉकिंग अधूरी है, किनारों का समतलीकरण नहीं हुआ और जल निकासी की व्यवस्था भी नहीं की गई।
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब ग्राम पंचायत के बालकेश ने दावा किया कि जिस मार्ग पर निर्माण हुआ है वह भूमि विवादित है और न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने गाटा संख्या 468 को अपनी निजी जमीन बताया। यदि यह दावा सही पाया जाता है तो सार्वजनिक धन से निजी भूमि पर निर्माण कराए जाने का मामला और गंभीर हो सकता है।
ग्रामीणों ने कार्य की स्वीकृत स्टीमेट, लंबाई- चौड़ाई और खर्च का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो ग्राम निधि के दुरुपयोग की यह प्रवृत्ति अन्य कार्यों में भी दोहराई जा सकती है।
मामले में संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
ग्राम पंचायत बड़हरा राजा का यह प्रकरण ग्रामीण विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक गांव का नहीं, बल्कि व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

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