Categories: लेख

गुरु घासीदास: सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध चेतना की अलख, सद्भावना का संदेश

जयंती विशेष | नवनीत मिश्र

भारतीय समाज में समता, सत्य और मानव गरिमा की चेतना को जन-जन तक पहुंचाने वाले सतनाम पंथ के संस्थापक गुरु घासीदास केवल एक संत नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार के अग्रदूत थे। उनकी जयंती सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष, सत्य के आग्रह और आपसी सद्भाव के संदेश को स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने ऐसे समय में समाज को नई दिशा दी, जब जाति, छुआछूत और अंधविश्वास ने मानवता को जकड़ रखा था। गुरु घासीदास ने उस दौर में जन्म लिया, जब समाज ऊंच-नीच, भेदभाव और पाखंड से ग्रस्त था। वंचित वर्ग के लिए सम्मान और समान अवसर की कल्पना भी कठिन थी। उन्होंने इन परिस्थितियों को स्वीकार करने के बजाय सामाजिक अन्याय के विरुद्ध शांतिपूर्ण वैचारिक संघर्ष का मार्ग चुना। उनका विश्वास था कि समाज का वास्तविक परिवर्तन आत्मशुद्धि और सत्याचरण से ही संभव है। उन्होंने सतनाम पंथ के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि ईश्वर सत्य में है और सत्य ही सबसे बड़ा धर्म है। कर्मकांड, दिखावे और बाहरी आडंबरों से परे जाकर उन्होंने सरल जीवन, सदाचार और मानव सेवा को धर्म का आधार बताया। सतनाम पंथ का दर्शन जाति, वर्ग और भेदभाव से मुक्त समाज की अवधारणा प्रस्तुत करता है। गुरु घासीदास ने अपने उपदेशों और आचरण से समाज में व्याप्त अनेक बुराइयों का विरोध किया। उन्होंने छुआछूत, नशाखोरी, हिंसा और अनैतिक जीवनशैली से दूर रहने का संदेश दिया। श्रम की गरिमा और आत्मसम्मान को उन्होंने जीवन का मूल मंत्र बनाया। उनका कहना था कि मनुष्य की पहचान जन्म से नहीं, बल्कि कर्म से होती है। उनका उद्देश्य केवल विरोध नहीं, बल्कि समाज को जोड़ना था। वे प्रेम, करुणा और भाईचारे पर आधारित सामाजिक व्यवस्था के पक्षधर थे। उनके विचारों ने समाज के कमजोर वर्ग को आत्मविश्वास दिया और समानता की भावना को मजबूती प्रदान की। वर्तमान समय में जब समाज विभाजन, असहिष्णुता और नैतिक संकट से गुजर रहा है, गुरु घासीदास का संदेश और अधिक प्रासंगिक हो गया है। सत्य, समता और सद्भाव के उनके विचार आज भी सामाजिक एकता का मजबूत आधार बन सकते हैं। बाबा गुरु घासीदास की जयंती केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लेने का अवसर है। सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष, सत्य का अनुसरण और मानवता के प्रति समर्पण, यही उनके जीवन और दर्शन का सार है। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही एक न्यायपूर्ण, समरस और सद्भावनापूर्ण समाज का निर्माण संभव है।

rkpnews@desk

Recent Posts

शालीमार बाग में आधी रात बुलडोजर एक्शन, मस्जिद का हिस्सा टूटने पर मचा हंगामा

https://twitter.com/shoaibJamei/status/2102541528044630125?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2102541528044630125%7Ctwgr%5Eac38023a5f57828b40c49625c4d8daf89271bf4b%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.prabhasakshi.com%2Fnational%2Fshalimar-bagh-madina-masjid-demolished-in-midnight-delhi-anti-encroachment-drive नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजधानी दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में मंगलवार…

2 minutes ago

संजा – मिट्टी की खुशबू का पर्व

हाँ, कच्ची दीवारों पर जब, संजा मुस्कुराती थी,मिट्टी-गोबर-फूलों से बेटियाँ दुनिया सजाती थीं।नन्ही-सी उँगलियों में…

11 minutes ago

आजमगढ़ में पत्नी-पंडितों की हत्या का आरोपी एनकाउंटर में ढेर, बेटे की भी मौत

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में पत्नी और दो पंडितों की गोली मारकर हत्या करने…

17 minutes ago

ड्यूटी से अचानक गायब हुए डॉक्टर, शौचालय में मिला शव; जांच में जुटी पुलिस

एम्स जोधपुर में पीजी रेजिडेंट डॉक्टर की मौत, शौचालय में मिला शव; पुलिस को आत्महत्या…

19 minutes ago

आज अमेरिका पहुंचेंगे शी जिनपिंग, ट्रंप के साथ होगी अहम बैठक

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 सितंबर यानी आज अमेरिका के दौरे पर पहुंचेंगे। यह…

24 minutes ago

कहीं आर्थिक लाभ तो कहीं तनाव, जानें सभी 12 राशियों का हाल

आज का राशिफल: आर्थिक लाभ से व्यापार में बढ़ेगी रफ्तार, कई राशियों को मिलेंगे सफलता…

2 hours ago