हॉन्गकॉन्ग में गूंजा गोरखपुर की बेटी का नाम

अंशिका यादव ने रचा स्वर्णिम इतिहास

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। खजनी क्षेत्र के गोरखपुर, उत्तर प्रदेश की धरती ने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्रतिभा और मेहनत के आगे कोई बाधा टीक नहीं सकती। खजनी क्षेत्र के छोटे से गांव जमौली बुजुर्ग की 17 वर्षीय अंशिका यादव ने हॉन्गकॉन्ग की धरती पर 5 वीं हॉन्गकॉन्ग चाइना इंटरनेशनल रेसलिंग प्रतियोगिता 2025 में 73 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल गोरखपुर, बल्कि पूरे देश को गर्व से भर दिया। अंशिका की यह उपलब्धि कोई संयोग नहीं, बल्कि उनकी कठिन मेहनत, समर्पण और अनुशासित प्रशिक्षण का नतीजा है। स्वर्गीय श्री ज्ञान सिंह व्यायामशाला में अपने प्रशिक्षक श्याम पाल और गोरखपुर कुश्ती संघ के अध्यक्ष दिनेश सिंह के मार्गदर्शन में अंशिका ने कुश्ती के दांव-पेंच सीखे। JWS बेंगलुरु की ओर से भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने प्रतियोगिता में कई अनुभवी अंतरराष्ट्रीय पहलवानों को अपने शानदार प्रदर्शन से चित कर दिया। उनके दमदार दांव और अटूट आत्मविश्वास ने विरोधियों को मैट पर बेबस कर दिया। अंशिका की इस जीत ने गोरखपुर के खेल जगत में खुशी की लहर दौड़ा दी है। गांव से लेकर शहर तक, हर कोई उनकी इस उपलब्धि का जश्न मना रहा है। स्थानीय लोग उन्हें ‘गोरखपुर की शेरनी’ कहकर पुकार रहे हैं। अंशिका की कहानी उन तमाम बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहरों या गांवों से निकलकर बड़े सपने देखती हैं। अंशिका का सफर यहीं नहीं रुकने वाला। उनकी नजर अब एशियन गेम्स और ओलंपिक जैसे वैश्विक मंचों पर स्वर्ण पदक जीतने पर है। उनके कोच श्याम पाल का कहना है, “अंशिका में वह जुनून और प्रतिभा है, जो उन्हें विश्व स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाने में मदद करेगी।” गोरखपुर की इस बेटी ने साबित कर दिया कि उम्र और संसाधनों की कमी सपनों के आड़े नहीं आ सकती। अंशिका यादव आज न केवल गोरखपुर की, बल्कि पूरे भारत की शान बन चुकी हैं। उनकी यह जीत हर उस युवा के लिए एक संदेश है कि मेहनत और लगन से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

Karan Pandey

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