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आत्महत्या रोकथाम पर गोरखपुर विश्वविद्यालय की संवेदनशील पहल, 1000 विद्यार्थियों ने लिया भाग

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा “आत्महत्या रोकथाम एवं मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन” विषय पर एक महत्वपूर्ण पीयर एजुकेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आत्महत्या की रोकथाम के उपायों पर सार्थक संवाद स्थापित करना था।

SDG-3 और SDG-4 के अनुरूप हाइब्रिड आयोजन

कार्यक्रम सुबह 10:30 बजे विभाग के यूजी लैब में आयोजित किया गया। यह आयोजन सतत विकास लक्ष्य—SDG-3 (उत्तम स्वास्थ्य एवं कल्याण) और SDG-4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) के अनुरूप हाइब्रिड मोड में संपन्न हुआ।
विश्वविद्यालय परिसर के विद्यार्थियों के साथ-साथ संबद्ध महाविद्यालयों के नोडल अधिकारी और छात्र-छात्राएं ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। लगभग 1000 विद्यार्थियों की भागीदारी ने कार्यक्रम की व्यापकता को दर्शाया।

विशेषज्ञों ने बताए आत्महत्या के कारण और समाधान

कुलपति प्रो. पूनम टंडन के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रियंका गौतम ने किया।

अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अनुभूति दुबे ने आत्महत्या के प्रमुख कारणों—शैक्षणिक दबाव, पारिवारिक तनाव, भावनात्मक असंतुलन, सामाजिक अलगाव और अवसाद—पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने चेतावनी संकेतों की पहचान, समय पर परामर्श, सहानुभूतिपूर्ण संवाद और पेशेवर काउंसलिंग की आवश्यकता पर जोर दिया।

विभागाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय कार्यबल के नोडल अधिकारी प्रो. धनंजय कुमार ने सकारात्मक सोच, तनाव प्रबंधन, आत्म-जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन का आधार बताया। उन्होंने पीयर एजुकेशन को विद्यार्थियों के बीच सहयोगात्मक और संवेदनशील वातावरण निर्माण का प्रभावी माध्यम बताया।

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संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम के अंत में आयोजित संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों और नोडल अधिकारियों ने प्रश्न पूछे और अपने विचार साझा किए। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रियंका गौतम ने प्रस्तुत किया।

जागरूकता ही सबसे बड़ा उपाय

कार्यक्रम ने स्पष्ट संदेश दिया कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए जागरूकता, सहानुभूति, संवाद और समय पर हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक हैं। विश्वविद्यालय की यह पहल विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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Karan Pandey

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