मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। ज्ञानी मनुष्य भगवान से किसी सांसारिक वस्तु की कामना नहीं करता, बल्कि ईश्वर को पाने की इच्छा रखता है। भगवान केवल समर्पण और शरणागत भाव से ही प्राप्त होते हैं। यह विचार अयोध्या से पधारे प्रख्यात मानस मर्मज्ञ और विद्वान संत परम पूज्य किशोरी शरण जी महाराज ने व्यक्त किए।
वे मऊ नगर के सिंधी कॉलोनी स्थित श्री दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर के वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोजित श्री राम कथा में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। महाराज जी ने कहा कि जब मनुष्य अपने अहंकार और मोह को त्याग देता है, तभी प्रभु की कृपा प्राप्त होती है।
कथा के दौरान उन्होंने मां सती और मां जानकी का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि प्रभु श्री राम के दर्शन की तीव्र इच्छा के कारण ही मां सती के मन में मोह उत्पन्न हुआ और वे परीक्षा लेने के भाव में उलझ गईं। यह प्रसंग हमें यह सिखाता है कि प्रभु की लीला को समझने के लिए पूर्ण श्रद्धा आवश्यक है।
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सुंदर कांड पाठ को लेकर किशोरी शरण जी महाराज ने भक्तों को सीख दी। उन्होंने कहा कि आज लोग सुंदर कांड का पाठ बहुत जल्दी-जल्दी कर लेते हैं, लेकिन लंका कांड रूपी मोह और पाप के जाल में जीवन भर उलझे रहते हैं और अपना बहुमूल्य जीवन व्यर्थ कर देते हैं।
नारी शक्ति की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि नारी अपने आदिशक्ति स्वरूप से पूरे परिवार को संभालती है और समाज को दिशा देती है। कार्यक्रम के अंत में मंदिर के पुजारी विवेकानंद पांडेय सहित अन्य गणमान्य लोगों ने आरती उतारी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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