पटना ।डॉ चंद्रशेखर राजद कोटे से नीतीश कैबिनेट में शामिल हैं। हालांकि, उनके बयान को लेकर राजद भी बैकफुट पर नजर आ रही है। दूसरी ओर गठबंधन में शामिल जदयू लगातार चंद्रशेखर से माफी की मांग कर रही है। इन सब के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज पहली बार इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि किसी भी धर्म के बारे में इस तरह का बयान देना, उस पर टिप्पणी करना बिल्कुल गलत है और ऐसा नहीं होना चाहिए। इसका मतलब साफ है कि नीतीश कुमार कहीं ना कहीं अपने मंत्री के इस बयान से सहमत नहीं है।
उन्होंने कहा कि धर्म के मामले में किसी को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। सब अपने तरीके से धर्म का पालन करते हैं। सभी धर्मों को इज्जत मिलनी चाहिए। जिसको जिनकी पूजा करनी है, वह करें। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब तो डिप्टी सीएम ने भी कह दिया है। आपको बता दें कि चंद्रशेखर के बयान को लेकर भाजपा जबरदस्त तरीके से राज्य और नीतीश सरकार पर हमलावर है। वहीं, दूसरी ओर जदयू का आरोप है कि चंद्रशेखर के इस बयान से भाजपा को फायदा होगा। यही कारण है कि ज्योति उन्हें भी चंद्रशेखर से उनके बयान पर माफी की मांग कर दी है।
हालांकि, चंद्रशेखर के बयान पर बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि संविधान देश की सबसे पवित्र किताब है। देश संविधान से चलता है। संविधान में क्या है? संविधान में हर धर्म का सम्मान करने के बारे में बताया गया है। हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपनी पार्टी राजद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दल जदयू के नेताओं के बीच हाल में हुए वाकयुद्ध के बारे में पत्रकारों के सवालों पर भड़क गये। उन्होंने सोमवार को उल्टे पत्रकारों से ही पूछ लिया कि उनके संगठनों में संपादक चीजों को तय करते हैं या संवाददाता संपादकों को बताते हैं कि क्या करना है।
गोरखपुर में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का तीन दिवसीय प्रवास, सामाजिक सद्भाव और संगठनात्मक मंथन…
भारत में एआई और डीपफेक पर सख्ती: सोशल मीडिया के लिए 3 घंटे का अल्टीमेटम,…
सुरक्षित इंटरनेट दिवस पर कलेक्ट्रेट में साइबर सुरक्षा कार्यशाला, एआई के प्रति जागरूक रहने का…
विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा एक्शन: इलेक्शन कमीशन ने किया सिस्टम री-सेट, अफसरों की कंफर्ट…
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। महराजगंज जिले में बिजली व्यवस्था की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा…
अद्वितीय है भारतीय ज्ञान परंपरा में पालि साहित्य का योगदान, गोरखपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी…