जो रोकता, जो टोकता है,
वही सत्य का दीप जला है।
जो कटु वचन से राह दिखाए,
सच मानो, सच्चा सखा है।
जिस बगिया का माली जागे,
हरियाली चारों ओर आए।
स्नेह से जो सींचे जड़ को,
उसका यश जग सारा गाए।
जहाँ न कोई अंकुश होता,
मन का पौधा सूख ही जाता।
बिन मर्यादा, बिन सिखवारे,
हर पथिक बस भटक ही जाता।
माली जो कांटे हटाता,
वही फूल की रक्षा करता।
धूप-सितम से लड़कर भी,
छाँव घनी वह सदा ही करता।
जीवन में जो दिशा दिखाए,
सन्मार्गों की ज्योत जलाए।
ऐसे माली को न भूलो,
उसके ऋण में शीश झुकाए।
बिन माली जो वृक्ष पलेगा,
वह झंझा में शीघ्र ढलेगा।
संस्कार की छाँव जरूरी,
बिन इसके सब शून्य लगेगा।
इस जीवन की राह कठिन है,
हर पथ पर संघर्ष घना है।
जो संवार दे बीज-नवेली,
वही माली धन्य बना है।
-प्रियंका सौरभ
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