पूजा में उमड़ा आस्था का सैलाब
पर्व विशेष
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस दिन को भगवान गणेश के अवतरण दिवस के रूप में जाना जाता है। विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और मंगलकारी देवता गणेश की पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही मंदिरों और घरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी है।
परंपरा के अनुसार भगवान गणेश का जन्म माता पार्वती द्वारा बनाए गए बालक के रूप में हुआ था। कथा के अनुसार शिव-पार्वती प्रसंग के दौरान गणेश का सिर काटे जाने और पुनः हाथी का सिर लगाए जाने से उन्हें गणपति के रूप में पूजित होने का गौरव प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर भक्तों ने गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की है और भजन-कीर्तन व आरती कर रहे है। घरों के साथ-साथ सार्वजनिक पंडालों में भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। जिले के विभिन्न स्थानों पर सजावट और रोशनी से उत्सव का माहौल बना हुआ है।
गणेशोत्सव का यह पर्व दस दिनों तक चलेगा। अंतिम दिन गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा, जिसके साथ भक्तगण “गणपति बप्पा मोरया” का जयघोष करते हुए उन्हें विदाई देंगे।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी इस पर्व का विशेष महत्व है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इस उत्सव को सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना का माध्यम बनाया था। तभी से गणेशोत्सव जनभागीदारी और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया।
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