खेल से राजनीति तक: 11 जनवरी को जन्मे लोगों की प्रेरक कहानियाँ

11 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व: राजनीति, खेल, साहित्य और दर्शन में अमिट छाप छोड़ने वाले नाम

11 जनवरी का दिन भारतीय और विश्व इतिहास में इसलिए विशेष है क्योंकि इस तिथि को जन्मे अनेक व्यक्तित्वों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर समाज, राष्ट्र और विश्व को नई दिशा दी। राजनीति, खेल, साहित्य, उद्योग, दर्शन और राष्ट्रसेवा—हर क्षेत्र में 11 जनवरी को जन्मे लोगों की उपलब्धियाँ प्रेरणास्रोत हैं। आइए, इतिहास के इन महत्वपूर्ण जन्मों पर विस्तार से नज़र डालते हैं।
अंकिता रैना (जन्म: 11 जनवरी 1993)
अंकिता रैना का जन्म उत्तराखंड के देहरादून जिले में हुआ। वे भारत की अग्रणी महिला टेनिस खिलाड़ियों में शामिल हैं और लंबे समय तक महिला एकल में भारत की नंबर एक खिलाड़ी रहीं। सीमित संसाधनों के बावजूद अंकिता ने अंतरराष्ट्रीय टेनिस में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश का मान बढ़ाया। उन्होंने फेड कप, एशियन गेम्स और कई आईटीएफ टूर्नामेंट्स में पदक जीते। महिला खेलों में उनकी सफलता ने युवा लड़कियों को खेल को करियर के रूप में अपनाने का आत्मविश्वास दिया। वे भारत में महिला टेनिस के विकास की मजबूत आवाज़ बनकर उभरी हैं।
राहुल द्रविड़ (जन्म: 11 जनवरी 1973)
राहुल द्रविड़ का जन्म इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ, जबकि उनका पालन-पोषण कर्नाटक के बेंगलुरु में हुआ। भारतीय क्रिकेट के “द वॉल” कहे जाने वाले द्रविड़ ने टेस्ट क्रिकेट में अनुशासन, तकनीक और धैर्य की मिसाल कायम की। उन्होंने 13,000 से अधिक टेस्ट रन बनाए और टीम इंडिया को कई ऐतिहासिक जीत दिलाईं। संन्यास के बाद उन्होंने कोच और मेंटर के रूप में भारतीय क्रिकेट को नई पीढ़ी दी। देशहित में उनका योगदान खेल से आगे बढ़कर चरित्र निर्माण और नेतृत्व विकास तक फैला है।

ये भी पढ़ें – 11 जनवरी: इतिहास की धड़कनों में दर्ज एक तारीख, जिसने दुनिया की दिशा बदली

मदन कौशिक (जन्म: 11 जनवरी 1965)
मदन कौशिक का जन्म हरिद्वार, उत्तराखंड में हुआ। वे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उत्तराखंड सरकार में मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। धार्मिक पर्यटन, शहरी विकास और जनकल्याण योजनाओं में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। हरिद्वार जैसे धार्मिक नगर के विकास और स्वच्छता अभियानों में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है। उन्होंने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखते हुए विकास को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
बाबूलाल मरांडी (जन्म: 11 जनवरी 1958)
बाबूलाल मरांडी का जन्म गिरिडीह जिला, झारखंड में हुआ। वे झारखंड राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री रहे। आदिवासी समाज से आने वाले मरांडी ने जनजातीय अधिकारों, शिक्षा और क्षेत्रीय विकास के लिए संघर्ष किया। झारखंड आंदोलन में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। उन्होंने राज्य की पहचान और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने में योगदान दिया। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की आवाज़ को उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति तक पहुँचाया।

ये भी पढ़ें – भारत रत्न विवाद: तेज प्रताप के बयान पर BJP का तीखा पलटवार

अनलजीत सिंह (जन्म: 11 जनवरी 1954)
अनलजीत सिंह का जन्म भारत में हुआ और वे एक प्रसिद्ध उद्योगपति हैं। मैक्स ग्रुप के संस्थापक के रूप में उन्होंने हेल्थकेयर, बीमा और शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए। मैक्स हेल्थकेयर के माध्यम से उन्होंने भारत में गुणवत्तापूर्ण निजी स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार दिया। रोजगार सृजन, निवेश और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के जरिए उनका योगदान देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास दोनों में महत्वपूर्ण है।
शिबु सोरेन (जन्म: 11 जनवरी 1944)
शिबु सोरेन का जन्म रामगढ़ जिला (वर्तमान झारखंड) में हुआ। वे झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक नेता और राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। “गुरुजी” के नाम से प्रसिद्ध सोरेन ने आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए लंबा संघर्ष किया। झारखंड राज्य के गठन में उनकी भूमिका ऐतिहासिक मानी जाती है। वे जनआंदोलनों से निकलकर सत्ता तक पहुँचे नेताओं में अग्रणी हैं।

ये भी पढ़ें – शीतलहर में मानवता की गर्माहट: रवीन्द्र बहादुर सिंह बने जरूरतमंदों की ढाल

सरस्वती राजामणि (जन्म: 11 जनवरी 1927)
सरस्वती राजामणि का जन्म तमिलनाडु, भारत में हुआ। वे भारत की सबसे कम उम्र की महिला जासूसों में से एक थीं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ खुफिया गतिविधियों में भाग लिया। कम उम्र में ही देशहित में जान जोखिम में डालकर काम करना उनके साहस और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उनका योगदान भले ही गुप्त रहा, लेकिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
लुइस प्रोतो बार्बोसा (जन्म: 11 जनवरी 1927)
लुइस प्रोतो बार्बोसा का जन्म गोवा, भारत में हुआ। वे प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट (गोवा) से जुड़े एक प्रमुख राजनीतिज्ञ थे। गोवा की क्षेत्रीय राजनीति में उन्होंने स्थानीय मुद्दों, स्वशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती दी। गोवा की सामाजिक-राजनीतिक पहचान को संरक्षित रखने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।

ये भी पढ़ें – IND vs NZ ODI Series: पहले वनडे से पहले भारत को झटका? नेट प्रैक्टिस में ऋषभ पंत चोटिल, BCCI अपडेट का इंतजार

श्रीधर पाठक (जन्म: 11 जनवरी 1860)
श्रीधर पाठक का जन्म उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ। वे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि और निबंधकार थे। खड़ी बोली हिंदी को साहित्यिक पहचान दिलाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, प्रकृति और मानवीय संवेदनाएँ प्रमुख हैं। हिंदी भाषा के विकास में उन्होंने जो भूमिका निभाई, वह आज भी साहित्य जगत में आदर के साथ स्मरण की जाती है।
विलियम जेम्स (जन्म: 11 जनवरी 1842)
विलियम जेम्स का जन्म न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ। वे विश्वप्रसिद्ध दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक थे तथा आधुनिक मनोविज्ञान के जनकों में गिने जाते हैं। प्रैग्मेटिज़्म दर्शन के विकास में उनका योगदान ऐतिहासिक है। उनकी विचारधारा ने शिक्षा, मनोविज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में वैश्विक सोच को प्रभावित किया, जिससे मानव व्यवहार को समझने की नई दिशा मिली।

Editor CP pandey

Recent Posts

होली अवकाश में बदलाव, 28 फरवरी को भी खुलेंगे बैंक व सरकारी कार्यालय

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)l प्रदेश में होली पर्व को लेकर घोषित सार्वजनिक अवकाश में…

2 hours ago

डीडीयू विश्वविद्यालय ने घोषित किया विभिन्न पाठ्यक्रमों का सेमेस्टर परिणाम

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा बी.फार्मा तृतीय सेमेस्टर, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर,…

3 hours ago

भारतीय ज्ञान परंपरा में लोक और शास्त्र का अद्भुत समन्वय: प्रो. अनामिका राय

ज्ञान से भारतीयता परिभाषित होती है, भारतीयता से ज्ञान नहीं: प्रो. अनामिका राय गोरखपुर (राष्ट्र…

3 hours ago

होम स्टे नीति-2025 से पर्यटन और रोजगार को मिलेगा नया विस्तार

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। पर्यटन विभाग द्वारा प्रख्यापित “उ0प्र0 बेड एण्ड ब्रेकफास्ट एवं…

4 hours ago

विज्ञान दिवस की पूर्व संध्या पर प्रतियोगिताओं की धूम

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस…

5 hours ago

28 फरवरी 2026 का पंचांग: त्रिपुष्कर योग में करें ये खास कार्य, मिलेगा तीन गुना फल

आज का पंचांग 28 फरवरी 2026: द्वादशी तिथि, त्रिपुष्कर योग, राहुकाल समय और शुभ मुहूर्त…

5 hours ago