राजगीर से नालंदा तक, फिल्मों के जरिए बिहार की ब्रांडिंग

बिहार बन रहा है भारत का नया सिनेमा हब: कैमरे की रोशनी में उभरती सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)जिस बिहार को अब तक उसकी प्राचीन संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता था, वही बिहार आज कैमरे की नजर में भारत का नया सिनेमा हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य की गलियां, घाट, पहाड़ियां और ऐतिहासिक स्थल अब फिल्मों की कहानियों का जीवंत कैनवास बनते जा रहे हैं। बिहार धीरे-धीरे मुंबई के बाद देश के एक बड़े फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान गढ़ रहा है।
बिहार अब केवल भोजपुरी या क्षेत्रीय सिनेमा तक सीमित नहीं रहा है। राज्य सरकार द्वारा लागू की गई बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति ने फिल्म निर्माताओं के लिए एक भरोसेमंद और सुविधाजनक माहौल तैयार किया है। इस नीति के तहत अब तक 40 फिल्मों को शूटिंग की अनुमति दी जा चुकी है, जिनमें से 33 फिल्मों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्मकारों का भरोसा बिहार पर लगातार बढ़ रहा है।

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पटना, राजगीर, नालंदा, गया, भागलपुर और मोतिहारी जैसे शहर अब शूटिंग लोकेशन के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। राजगीर की पहाड़ियां, नालंदा का ऐतिहासिक वैभव, गया के धार्मिक घाट, भागलपुर की प्राकृतिक सुंदरता और मोतिहारी की साहित्यिक विरासत फिल्मों को एक अलग और प्रभावशाली दृश्यात्मक पहचान दे रही हैं। इन लोकेशनों के माध्यम से बिहार की सकारात्मक छवि देश-दुनिया तक पहुंच रही है।
राज्य में अब भोजपुरी और मगही फिल्मों के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी फिल्मों की शूटिंग भी बढ़ रही है। इससे स्पष्ट है कि बिहार का सिनेमा क्षेत्रीय सीमाओं को तोड़कर राष्ट्रीय और वैश्विक मंच की ओर अग्रसर है। फिल्म शूटिंग से होटल, कैटरिंग, ट्रांसपोर्ट, लाइटिंग, सेट डिजाइन और स्थानीय तकनीशियनों को बड़ा लाभ मिल रहा है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और सिनेमा बिहार की अर्थव्यवस्था का मजबूत इंजन बनता जा रहा है।

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बिहार राज्य फिल्म विकास निगम द्वारा युवाओं के लिए वर्कशॉप और मास्टर क्लास आयोजित की जा रही हैं, जिनमें कैमरा ऑपरेशन, साउंड रिकॉर्डिंग, एडिटिंग और फिल्म प्रोडक्शन की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने मार्च-अप्रैल में मुंबई में बड़े फिल्म निर्माताओं के साथ बैठक कर बिहार को एक सशक्त फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।
बिहार अब केवल इतिहास की धरती नहीं, बल्कि सिनेमा की नई प्रयोगशाला बनता जा रहा है, जो आने वाले समय में भारतीय फिल्म उद्योग का एक बड़ा चेहरा बन सकता है।

Editor CP pandey

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