महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। शिकारपुर चौराहे से दरौली को जोड़ने वाला मार्ग इन दिनों नशे और अव्यवस्था का केंद्र बनता जा रहा है। इस मार्ग पर स्थित देशी शराब की दुकान अब केवल बिक्री स्थल नहीं, बल्कि विवाद और सामाजिक पतन का अड्डा बन चुकी है। चिंताजनक बात यह है कि इसी मार्ग पर एक प्राचीन कोट देवी का स्थल, शैक्षणिक संस्थान तथा आमजन के दैनिक आवागमन का रास्ता भी है।
सायंकालीन बेला में शराब पीने वालों की संख्या अचानक बढ़ जाने से स्थानीय परिवारों, महिलाओं, बच्चों और विद्यार्थियों का आना- जाना दूभर हो गया है। आए दिन गाली-गलौज, हुड़दंग और जुए जैसी गतिविधियों से वातावरण असुरक्षित होता जा रहा है।
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स्थानीय सम्मानित नागरिकों का कहना है कि यह शराब की भट्टी ही आज की युवा नशे में डूबी पीढ़ी के विनाश की जड़ बनती जा रही है। किशोरा अवस्था से ही युवाओं का नशे की ओर झुकाव समाज के भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।लोगों का आरोप है कि एक ओर सरकार जगह-जगह शराब की दुकानों के लाइसेंस जारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर नशाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंधों की बात भी करती है। ऐसे में जनता के बीच सरकार की वास्तविक नीति को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति एक तरफ शांति पाठ, दूसरी तरफ खुराफात की जड़ बोने जैसी प्रतीत होती है।
गिरजेश, सुरेंद्र, राजीव, रंजीत, विकास सहित अन्य ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इसी तरह शराब की दुकानों की संख्या बढ़ती रही तो समाज में भ्रष्टाचार, अपराध और नैतिक पतन का ही बोलबाला रहेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और आबादी वाले क्षेत्रों से शराब की दुकानों को हटाया जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन और सरकार इस उभरती सामाजिक समस्या पर समय रहते कोई ठोस कदम उठाती है या फिर नशे की यह आग आने वाली पीढ़ी को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लेगी।
