बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
स्थापना दिवस के अवसर पर स्थानीय रंजू सिंह महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना का स्थापना दिवस को उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः कालीन सत्र में स्वंयसेवकों ने महाविद्यालय प्रांगण में सफाई अभियान चलाया तथा पौधों की निराई गुनाई की। दूसरे सत्र में बौद्धिक परिचर्चा की गई।
सभा में सरस्वती वन्दना से सभा की शुरुआत की गई। सभा को संबोधित करते हुए डॉ राखी रावत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक के कर्तब्यों पर अपना विचार रखते हुए, नाट मि बट यू, धेय वाक्य पर सबका ध्यान आकर्षित किया। वहीं सभा को सम्बोधित करते हुए विनोद सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना देश के युवाओं में व्यक्तित्व विकास करने के लिए युवा कार्यक्रम खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जाता है। स्थापना दिवस हर साल 24 सितंबर को मनाया जाता है क्योंकि राष्ट्रीय सेवा योजना की स्थापना 24 सितंबर, 1969 में की गई थी। इस संगठन की स्थापना की बात आजादी पूर्व से महात्मा गांधी के समय से चल रही थी, जिसे अंतिम रूप 1969 में दिया गया। राष्ट्रीय सेवा योजना की गतिविधियों में भाग लेने वाले विद्यार्थी, समाज के लोगों के साथ मिलकर समाज के हित में कार्य करते है, जैसे- साक्षरता संबंधी कार्य, पर्यावरण सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं सफाई, आपातकालीन या प्राकृतिक आपदा के समय पीडि़त लोगों की सहायता आदि।
आज हमारे देश में करीब 65 फीसदी जनसंख्या युवा है, जिनके कंधों पर ही देश की जिम्मेदारी है, और ये युवा देश के विकास में अपनी भूमिका निभा भी रहे हैं। देश निर्माण में युवाओं की भूमिका बढ़ाने और उन्हें देश के साथ जोड़ने का सबसे पहला प्रयास महात्मा गांधी ने आजादी के पहले शुरू कर दिया था। आजादी के समय गांधी जी ने युवाओं को राष्ट्रीय सेवा से जोड़ने पर विशेष बल दिया था। आजादी के बाद एस राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने शैक्षिक संस्थानों में स्वैच्छिक राष्ट्रीय सेवा शुरू करने की सिफारिश की थी। इस पर केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड ने जनवरी, 1950 में अपनी बैठक में विचार किया। जबकि 2 वर्ष बाद भारत सरकार ने पंचवर्षीय योजना के तहत 1 वर्ष छात्रों के सामाजिक एवं श्रम सेवा पर बल दिया। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इस विषय पर संज्ञान लिया और फिर शिक्षा मंत्री सम्मेलन में राष्ट्रीय सेवा योजना का मसौदा पेश किया गया। इसके तहत 28 अगस्त, 1959 को एक राष्ट्रीय सेवा समिति की स्थापना की गई।जबकि राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम की शुरुआत तत्कालीन शिक्षामंत्री डॉ. वी.के. आर.वी. राव ने 24 सितंबर, 1969 को 37 विश्वविद्यालयों में किया गया था, जिसमें लगभग 40,000 स्वयंसेवियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ संतोष सिंह, आराधना सिंह, डॉ पूनम मिश्रा, बलराम तिवारी,नवनीत रावत, मनोज सिंह, अमित कुमार, सीमा, हर्ष,सिंह, शिल्पा, आँचल, पूजा, प्रियंका, जितेन्द्र आदि ने भाग लिया।
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