ज्ञान का पर्व: गुरु पूर्णिमा

नवनीत मिश्र

भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि माना गया है। वैदिक काल से लेकर वर्तमान युग तक, गुरु को वह दिव्य व्यक्तित्व माना गया है, जो अज्ञान के अंधकार से निकालकर शिष्य को ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। गुरु पूर्णिमा उसी श्रद्धा, समर्पण और ज्ञान की परंपरा का उत्सव है। यह पर्व न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन आदिगुरु वेदव्यास जी का जन्म हुआ था, जिन्होंने वेदों का विभाजन कर उन्हें व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया। इसीलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। उन्होंने महाभारत, 18 पुराण और ब्रह्मसूत्र की रचना कर भारतीय ज्ञान परंपरा को अमूल्य धरोहर सौंपी। अतः वे ज्ञान के आदि स्रोत और गुरु परंपरा के आधारस्तंभ माने जाते हैं।
गुरु केवल एक शिक्षक नहीं, अपितु वह मार्गदर्शक है जो शिष्य को आत्मबोध की ओर प्रेरित करता है। संत कबीरदास ने कहा है कि –

“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय,
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।”

यह दोहा गुरु की महत्ता को दर्शाता है कि ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग भी गुरु ही दिखाता है। वह शिष्य के जीवन को नई दिशा देता है, उसके व्यक्तित्व का निखार करता है और उसे संसार की नकारात्मकताओं से ऊपर उठने की प्रेरणा देता है।
आज के प्रतिस्पर्धात्मक और भौतिकतावादी युग में भी गुरु की भूमिका उतनी ही आवश्यक है। डिजिटल शिक्षा, तकनीकी नवाचार और त्वरित ज्ञान-स्रोतों के बावजूद एक सच्चे गुरु की भूमिका को कोई तकनीक प्रतिस्थापित नहीं कर सकती। आज शिक्षक, जीवन को दिशा देने वाला काउंसलर, माता-पिता, आध्यात्मिक संत या कोई प्रेरणास्रोत—सभी गुरु के रूप में देखे जाते हैं।
गुरु पूर्णिमा का दिन आत्मविश्लेषण, कृतज्ञता और समर्पण का दिन होता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हम जिन ऊंचाइयों को छूते हैं, उनके मूल में हमारे गुरु का मार्गदर्शन और आशीर्वाद होता है। इस दिन शिष्य अपने गुरु को श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हैं, उनके सान्निध्य में बैठकर ज्ञान-प्राप्ति का संकल्प लेते हैं।
गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि एक चेतना हैl वह चेतना जो मनुष्य को अज्ञानता से ज्ञान, भ्रम से विश्वास और असत्य से सत्य की ओर ले जाती है। इस पावन अवसर पर हमें अपने जीवन में गुरु के महत्व को समझते हुए, उन्हें सच्चे हृदय से नमन करना चाहिए और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।

“गुरु के बिना ज्ञान नहीं, ज्ञान के बिना मोक्ष नहीं।”
गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं!

rkpNavneet Mishra

Recent Posts

किसान कांग्रेस के जिला अध्यक्षों की नई सूची जारी,धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय को देवरिया की कमान

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश में किसान कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की दिशा…

3 hours ago

गांव-गांव पहुंचाया गया राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0 का संदेश

आपसी सुलह-समझौते से मामलों के त्वरित और कम खर्चीले समाधान के लिए ग्रामीणों को किया…

7 hours ago

आगरा में 16 नवंबर से शुरू होगी स्व-गणना, 1200 से ज्यादा वोटर वाले बूथों पर DM की नजर; जानें पूरी समयसीमा

आगरा में जनगणना से लेकर वोटर लिस्ट से जननी सुरक्षा योजना का जाना DM मनीष…

7 hours ago

मां तरकुलहा देवी धाम में मां कात्यायनी की पूजा, दुर्गा सप्तशती पाठ के बाद बंटा प्रसाद

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। शारदीय नवरात्रि के छठे दिन को पूर्वांचल के प्रमुख शक्तिपीठ मां…

8 hours ago

समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्यों पर जोर, लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। आकांक्षात्मक विकास खंड हुजूरपुर में विकास कार्यों की समीक्षा बैठक मुख्य…

8 hours ago

तिरंगे को लेकर आमने-सामने सरकार और विपक्ष? CJP मार्च से पहले कार्रवाई, AAP से ममता-अखिलेश तक ने घेरा

फोटो X नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को ‘लहरा दो तिरंगा’…

8 hours ago