बलूचिस्तान में चीनी सेना की आशंका, भारत के लिए क्यों है बड़ा खतरा?

चीन की नजर बलूचिस्तान पर? मीर यार बलोच की चेतावनी से बढ़ी भारत की रणनीतिक चिंता

सांकेतिक

इस्लामाबाद /नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। बलूच नेता मीर यार बलोच द्वारा भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को लिखे गए एक खुले पत्र ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। पत्र में मीर यार बलोच ने आशंका जताई है कि यदि हालात यूं ही बने रहे तो आने वाले कुछ महीनों में चीन बलूचिस्तान में अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर सकता है, जो न सिर्फ बलोच जनता बल्कि भारत की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा होगा।

ये भी पढ़ें – ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर: ट्रंप की धमकी पर भड़के ईरानी विदेश मंत्री, बोले— “हमारी सेनाओं को पता है कहां हमला करना है”

मीर यार बलोच ने साफ शब्दों में कहा है कि छह करोड़ बलोच लोगों की सहमति के बिना बलूचिस्तान की धरती पर चीनी सेना की मौजूदगी एक अकल्पनीय चुनौती बन सकती है। उनका तर्क है कि पाकिस्तान पहले से ही बलूच आंदोलन को दबाने के लिए सैन्य दमन का रास्ता अपनाता रहा है और यदि चीन भी प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुआ, तो यह संघर्ष और असमान हो जाएगा।
भू-रणनीतिक दृष्टि से बलूचिस्तान बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। इसके उत्तर-पश्चिम में अफगानिस्तान, पश्चिम में ईरान और दक्षिण में अरब सागर स्थित है। यही नहीं, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) भी इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिसका भारत पहले से विरोध करता रहा है क्योंकि यह परियोजना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर निकलती है।

ये भी पढ़ें – संगम तट पर आस्था का महासंगम: माघ मेला शुरू, पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

इतिहास पर नजर डालें तो 1948 तक बलूचिस्तान एक स्वतंत्र राजशाही के रूप में अस्तित्व में था और ब्रिटिश भारत का हिस्सा नहीं था। मार्च 1948 में पाकिस्तानी सेना द्वारा कब्जे के बाद से ही बलोच समाज लगातार प्रतिरोध करता आ रहा है। बीते 75 वर्षों में हजारों बलोच नागरिकों के मारे जाने के आरोप पाकिस्तानी सेना पर लगते रहे हैं।
मीर यार बलोच ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत सरकार की सराहना भी की और कहा कि भारत और बलूचिस्तान दोनों के सामने खतरे वास्तविक हैं, इसलिए संबंध भी केवल नैतिक समर्थन तक सीमित न रहकर ठोस रणनीति पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नई दिल्ली में बलूचिस्तान का दूतावास खोलने की मांग भी की थी।

ये भी पढ़ें – निंदा से डरे बिना काम करते रहना चाहिए: सावित्रीबाई फुले

मई 2025 में मीर यार बलोच द्वारा पाकिस्तान से बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की घोषणा और संयुक्त राष्ट्र से मान्यता की अपील ने इस मुद्दे को और वैश्विक बना दिया है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि भारत इस घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाता है।

Editor CP pandey

Recent Posts

देवरिया में किसान दिवस: योजनाओं की जानकारी और समस्याओं के समाधान पर जोर

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में किसानों की आय बढ़ाने, कृषि योजनाओं की जानकारी गांव…

3 hours ago

प्यार का दर्दनाक अंजाम!मामा-भांजी के रिश्ते में पनपा प्रेम बना मौत की वजह — युवती की मौत, युवक इलाज के बाद पुलिस हिरासत में

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)।जनपद के महराजगंज में प्रेम प्रसंग का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है,…

4 hours ago

किसान दिवस: सहफसली खेती और डिजिटल कृषि योजनाओं पर प्रशासन का फोकस

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में आयोजित किसान दिवस कार्यक्रम ने कृषि विकास, किसानों की…

4 hours ago

‘एक जनपद-एक व्यंजन’ से पूर्वांचल के स्वाद को मिलेगी नई पहचान

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा प्रस्तावित ‘ओडीओसी' अभियान का शुभारंभ गोरखपुर…

5 hours ago

मूलभूत सुविधाओं को लेकर बरहज रेलवे स्टेशन पर कांग्रेस का अनिश्चितकालीन धरना

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। ब्रिटिश काल में बने बरहज रेलवे स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं के…

5 hours ago

भागवत कथा, भजन संध्या और रामलीला ने रचा आध्यात्मिक उत्सव

बनकटाशिव सल्लहपुर देवरिया में श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ का भव्य चौथा दिन, श्रद्धा-भक्ति से गूंजा नवनिर्मित…

5 hours ago