देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)।
जिला कलेक्ट्रेट देवरिया परिसर में उत्तर प्रदेश खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन की जिला कमेटी के आह्वान पर केंद्रीय बजट के विरोध तथा पुराने मनरेगा को बहाल करने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत किया गया, जिसमें राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा गया।
धरने को संबोधित करते हुए खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड सतीश कुमार ने कहा कि वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत नवीनतम केंद्रीय बजट मेहनतकश जनता की अनदेखी करता है। बजट में एक बार फिर कॉरपोरेट और बड़े पूंजीपतियों को टैक्स रियायत, छूट और दीर्घकालिक टैक्स हॉलिडे जैसी सुविधाएं दी गई हैं, जबकि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि सामाजिक क्षेत्र के आवंटन में भारी कटौती कर सरकार ने जनता की वास्तविक चिंताओं से मुंह मोड़ लिया है।
किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के बजट में गंभीर कमी दिखाई देती है। बढ़ती महंगाई के मुकाबले बजट में की गई मामूली बढ़ोतरी नाकाफी है। छोटे और सीमांत किसानों व खेत मजदूरों से जुड़ी योजनाओं—प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना और प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना—के आवंटन में कटौती की गई है।
खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन के जिला मंत्री कामरेड रामनिवास यादव ने बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि विकसित भारत ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन के लिए किया गया आवंटन सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। मनरेगा के स्थान पर लाई गई नई योजना में रोजगार के दिनों को बढ़ाने के दावों के विपरीत बजट प्रावधान कमजोर हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार ग्रामीण रोजगार की गारंटी को लेकर गंभीर नहीं है।
धरने में कामरेड बालेंद्र मौर्य ने कहा कि ग्रामीण विकास से जुड़ी पेंशन योजनाओं में या तो कटौती की गई है या कोई ठोस सुधार नहीं किया गया है। राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का आवंटन घटाया गया है, जबकि विधवा और दिव्यांग पेंशन योजनाएं पिछले वर्ष के स्तर पर ही सीमित हैं। उन्होंने पेयजल, शिक्षा, उच्च शिक्षा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में बजट कटौती पर भी सवाल उठाए।
इस धरने की अध्यक्षता हरिवंश प्रसाद ने की तथा संचालन कामरेड परमहंस भारती ने किया। प्रदर्शन में सैकड़ों लोग शामिल रहे, जिनमें सतीश कुमार, जयप्रकाश यादव, प्रेम चंद्र यादव, हरिबद प्रसाद, संजय कुमार गोंड, बलविंदर मौर्य, दुर्गेश पासवान, गंगा देवी, पूनम देवी और लीलावती देवी प्रमुख रूप से मौजूद रहीं।
