आजमगढ़ (राष्ट्र की परम्परा)
खिरिया बाग आंदोलन के 91 वें दिन प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सौम्य दत्त धरने के समर्थन में पहुंचे, इस मौके पर मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित डॉ संदीप पाण्डेय, रवि शेखर, एकता शेखर, अभिषेक दूबे, सानिया अनवर, अंशुमान, निम्मी, इज़्मत अंसारी, सीलम भारती ने भी पर्यावरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर संबोधित किया।
प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सौम्य दत्त ने कहा कि सरकार पेड़ लगाने की बात करती है, लेकिन हवाई जहाज चलाकर जो प्रदूषण कर रही है उसकी कीमत जनता को चुकानी पड़ती है। हवाई जहाज से यात्रा करने में तेज रफ्तार की रेल गाड़ी की तुलना में प्रति यात्री 6 से 8 गुणा कार्बन उत्सर्जन होगा। नरेन्द्र मोदी की मेक इन इण्डिया कल्पना के विपरीत, हवाई जहाज अमरीका या यूरोप से बन कर आएंगे जबकि वंदे भारत जैसी तेज रफ्तार वाली रेल गाड़ी हमारे यहां बनती है। यदि आजमगढ़ से दिल्ली की दूरी तय करने के लिए हवाई यात्रा की बजाए रेल लाइन सुदृढ़ करके तेज रफ्तार वाली रेल गाड़ी चलाई जाए तो शायद कुछ ही घंटों में वही यात्रा रेल से हो सकती है, रेल गाड़ी की क्षमता ज्यादा होगी, खर्च कम आएगा व भू-अधिग्रहण से होने वाली क्षति से भी बच जाएंगे, एयरपोर्ट के नाम लाखों पेड़ काट दिए जाएंगे जिससे पर्यावरण असन्तुलित होगा,जबकि किसान सबसे बड़ा पर्यावरणविद है।
नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में यह घोषित किया है कि 2070 तक भारत एक कार्बन तटस्थ देश बन जाएगा यानी हम जितना कार्बन उत्सर्जित करेंगे उतना सोख भी लेंगे, किंतु यदि हम हवाई यात्रा को बढ़ावा देंगे तो कार्बन उत्सर्जन तो बढ़ेगा ही इसलिए भी आजमगढ़ का प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा नरेन्द्र मोदी की घोषणा के विपरीत है।
यदि हमें कार्बन उत्सर्जन कम करना है तो हमें ऐसे यातायात के साधनों को बढ़ावा देना होगा जिनसे प्रदूषण कम हो, जीवाश्म ईंधन से संचालित होने वाले साधन ज्यादा प्रदूषण करेंगे ही। इसलिए हमे गैर-जीवाश्म ईंधन से संचालित रेलगाड़ी को बढ़ावा देने की योजना बनानी चाहिए, हम आजमगढ़ से हवाई यात्रा का विकल्प नही दे सकते हैं।
यह बातें खिरिया बाग, आजमगढ़ में जहां पिछले 91 दिनों से प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के खिलाफ आंदोलन चल रहा है, जाने माने पर्यावरणविद एवं जलवायु परिवर्तन पर काम करने वाले सौम्य दत्त ने कहीं. सौम्य दत्त पिछले दिनों मिस्र में हुए जलवायु परिवर्तन पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सी.ओ.पी. 27 में भाग लेकर लौटे हैं, वे 2009 में सी.ओ.पी. 15 से लेकर सारे सी.ओ.पी. सम्मेलनों में भागीदार रहे हैं और दुनिया के पैमाने पर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक मजबूत आवाज हैं।
पर्यावरण सम्मेलन का संचालन किसान नेता राजीव यादव ने किया। इस अवसर पर वीरेंद्र यादव, अभिषेक यादव, नीलम, अर्चना यादव, अवनीश यादव, महेंद्र यादव आदि ने भी विचार व्यक्त किया।
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