Tuesday, January 13, 2026
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डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में ‘स्नेह’- हैप्पीनेस एंड होलिस्टिक वेल-बीइंग सेंटर की स्थापना

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)l दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा छात्रों एवं विश्वविद्यालय समुदाय के समग्र विकास के उद्देश्य से एक नवीन हैप्पीनेस एंड होलिस्टिक वेल-बीइंग सेंटर की स्थापना की जा रही है। यह केंद्र पीएम–उषा (PM–USHA) अनुदान की सॉफ्ट स्किल एवं ट्रेनिंग इकाई के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है। हाल ही में नैक से A++ मान्यता प्राप्त करने के बाद विश्वविद्यालय में छात्र-केंद्रित, गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचार आधारित पहलों को नई गति मिली है। इसी क्रम में यह केंद्र ‘स्नेह (SNEH)’ नाम से स्थापित किया जा रहा है, जिसका आशय है—Space to Nurture, Energize and Heal, यानी पोषण, ऊर्जा और उपचार के लिए एक सुरक्षित एवं सकारात्मक स्थान।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि नैक A++ मान्यता के बाद विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, कौशल-विकास और सामाजिक उपयोगिता को भी संस्थागत स्वरूप देना है। उन्होंने कहा कि ‘स्नेह’ केंद्र छात्रों के साथ-साथ समाज, विद्यालयों और कार्यस्थलों के लिए वैज्ञानिक एवं प्रमाण-आधारित वेल-बीइंग तथा सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण का केंद्र बनेगा। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की भावना के अनुरूप एक संवेदनशील और उत्तरदायी विश्वविद्यालय मॉडल प्रस्तुत करती है।
मनोविज्ञान विभाग के अनुसार वर्तमान समय में विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक, कर्मचारी और कार्यरत पेशेवर सभी तनाव, समय-दबाव, प्रदर्शन-चिंता और भावनात्मक असंतुलन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘स्नेह’ केंद्र को विश्वविद्यालय, समाज, विद्यालय और उद्योग के बीच एक सक्रिय सेतु के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि वैज्ञानिक मनोविज्ञान आधारित प्रशिक्षण व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराया जा सके।
विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय कुमार ने बताया कि यह केंद्र एक एप्लाइड साइकोलॉजी एवं ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा, जहां विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ-साथ विद्यालयों के शिक्षक एवं छात्र, सामाजिक संस्थाएं तथा कंपनियों और उद्योगों के कर्मचारी विभाग के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में संरचित प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। इससे विश्वविद्यालय की आउटरीच और एक्सटेंशन गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।
‘स्नेह’ केंद्र की सबसे महत्वपूर्ण और उन्नत सुविधा इसका बायोफीडबैक कक्ष होगा, जहां वैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से यह मापा जाएगा कि तनाव, घबराहट, क्रोध या मानसिक दबाव की स्थिति में शरीर के भीतर किस प्रकार के जैविक परिवर्तन हो रहे हैं। इन मापों में हृदयगति, श्वसन, त्वचा की विद्युत चालकता, मांसपेशियों का तनाव और ध्यान व एकाग्रता से जुड़े संकेत शामिल होंगे। यह तकनीक व्यक्ति को रीयल-टाइम में अपने शरीर की प्रतिक्रियाएं देखने में सक्षम बनाएगी, जिससे तनाव केवल महसूस की जाने वाली स्थिति न रहकर मापी जा सकने वाली प्रक्रिया बन सकेगी।
मनोविज्ञान विभाग ने बताया कि बायोफीडबैक आधारित प्रशिक्षण में पहले प्रतिभागी की बेसलाइन रिकॉर्डिंग की जाएगी, उसके बाद माइंडफुलनेस, श्वसन अभ्यास, रिलैक्सेशन तकनीक और व्यवहारिक रणनीतियों का अभ्यास कराया जाएगा। प्रशिक्षण के पश्चात दोबारा मापन कर यह देखा जाएगा कि व्यक्ति के शारीरिक संकेतों में कितना सकारात्मक परिवर्तन आया है, जिससे प्रतिभागी स्वयं यह समझ सके कि कौन-सी तकनीक उसके लिए अधिक प्रभावी है।
यह बायोफीडबैक आधारित प्रशिक्षण केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यालयों में परीक्षा-चिंता और ध्यान-समस्या, समाज एवं सामुदायिक समूहों में तनाव व क्रोध-प्रबंधन, तथा कंपनियों और उद्योगों में कार्यस्थल तनाव, बर्नआउट, प्रदर्शन-चिंता और नेतृत्व विकास जैसे विषयों पर टेलर-मेड प्रशिक्षण मॉड्यूल के रूप में लागू किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिभागियों में आत्म-नियमन की व्यावहारिक क्षमता विकसित की जाएगी, जिससे वे वास्तविक जीवन और कार्य-परिस्थितियों में अपने तनाव और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को बेहतर ढंग से नियंत्रित कर सकें।
डीन, स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. अनुभूति दुबे ने कहा कि बायोफीडबैक आधारित हस्तक्षेप विश्वविद्यालय परिसर में प्रिवेंटिव मेंटल हेल्थ केयर को नई दिशा देंगे। जब व्यक्ति अपने सुधार को आंकड़ों और ग्राफ के रूप में देखता है, तो उसकी भागीदारी और आत्मविश्वास दोनों बढ़ते हैं, जिससे मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और जिम्मेदारी की संस्कृति विकसित होती है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि केंद्र में संकलित बायोफीडबैक से जुड़े आंकड़ों का उपयोग गोपनीयता और नैतिक मानकों के अनुरूप अनुसंधान, प्रशिक्षण डिज़ाइन और नीति-निर्माण में किया जाएगा। इस प्रकार ‘स्नेह’ केंद्र मानसिक स्वास्थ्य, सॉफ्ट स्किल विकास, शोध-उन्मुख प्रशिक्षण और समाजोपयोगी सेवाओं का एक समन्वित और वैज्ञानिक मॉडल बनकर उभरेगा।
अंत में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि ‘स्नेह’ केंद्र न केवल विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए, बल्कि समाज, विद्यालयों और उद्योग जगत के लिए भी मानसिक स्वास्थ्य और सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण का एक विश्वसनीय और प्रभावी केंद्र बनेगा।

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