महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। विकासखंड सदर अंतर्गत सेमरा राजा गांव में स्थित सरकारी पोखरी पर लंबे समय से हो रहे अतिक्रमण का मामला प्रशासनिक उदासीनता के कारण गंभीर रूप लेता जा रहा है। मंदिर के समीप स्थित इस पोखरी पर ग्रामीणों द्वारा मिट्टी भरकर निजी उपयोग किए जाने से इसका प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्वरूप लगातार नष्ट होता जा रहा है, लेकिन शिकायतों के बावजूद राजस्व विभाग अब तक बेखबर बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार यह पोखरी वर्षों से गांव में जल संरक्षण, धार्मिक अनुष्ठानों, सामाजिक आयोजनों तथा पशुओं के पानी की प्रमुख व्यवस्था रही है। मंदिर से सटे होने के कारण इसका धार्मिक महत्व भी है। पहले जहां वर्ष भर पानी उपलब्ध रहता था, वहीं अब अतिक्रमण के कारण पोखरी का क्षेत्रफल लगातार सिमटता जा रहा है और जल स्रोत समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पोखरी की भूमि पर जान-बूझकर मिट्टी डलवाकर समतल किया जा रहा है और बाद में उसे निजी उपयोग में लाया जा रहा है। इस संबंध में कई बार राजस्व विभाग व स्थानीय प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन मौके पर न तो सीमांकन कराया गया और न ही कब्जा हटाने की कोई कार्रवाई की गई। केवल कागजी आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया, जिससे अतिक्रमणकारियों के हौसले और बुलंद हो गए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में यह पोखरी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, जिससे गांव में जल संकट और गहरा जाएगा। साथ ही सरकारी भूमि पर हो रहे खुले कब्जे से प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सरकारी पोखरी का तत्काल सीमांकन कराया जाए, अतिक्रमण हटाकर उसके मूल स्वरूप को बहाल किया जाए तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही पोखरी के संरक्षण के लिए स्थायी उपाय किए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को जलस्रोत का लाभ मिल सके।
सरकारी पोखरी पर अतिक्रमण, राजस्व विभाग की उदासीनता से जलस्रोत पर संकट
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