Tuesday, February 17, 2026
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आवास के लिए भटक रहे पात्र,अपात्रों ने उठाया लाभ

सूरतगंज /बाराबंकी(राष्ट्र की परम्परा)
प्रधानमंत्री की महत्वकांक्षी योजना पीएम आवास (ग्रामीण) में जमकर मनमानी की गई। जिम्मेदारों ने आपस में सांठगांठ कर अपात्रों को इसका लाभ दिया। वहीं पात्र गरीब आवास के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। स्थिति यह है कि निगरानी के लिए तैनात, खंड विकास अधिकारी आंख बंद किए हुए हैं। बगैर शिकायत ना तो जांच हो रही है। और ना ही फर्जीवाड़ा पकड़ा जा रहा है।
मामला रामनगर तहसील क्षेत्र के सूरतगंज ब्लॉक अन्तर्गत ग्राम पंचायत करमुल्लापुर का है। जहां भिटौली निवासी समित अवस्थी लगातार तीन वर्षों से लिखित पत्र के जरिए आवास की मांग कर रहे हैं। घर ना होने से मन्दिर में शरणागत है। इनका आवास सूची में नाम भी शामिल था जो अब काटा जा चुका है। आवास काटने का कारण शपथ लेते हुए सचिव रोहित वर्मा ने पक्का मकान बताया था। जबकि तहसील दिवस में दिए गए शिकायती पत्र पर, जांचकर सहायक पंचायत अधिकारी व संयुक्त टीम ने पात्र दर्शाया था। कोई पक्का घर ना होने से परिवार परेशान है। साक्ष्यों की माने तो सन 2021 के बाद से अब तक परिवार मन्दिर में रहने को विवश है। हैरानी की बात ये है कि तमाम शिकायतों के बाद भी ब्लॉक के किसी अधिकारी ने कोई ध्यान नही दिया। शायद यही कारण है कि गरीब परिवार अब मन्दिर की शरण में है। जबकि सरकार का लक्ष्य है कि योजना का लाभ ऐसे गरीब परिवारों को मिले, जिनके पास रहने को पक्का मकान दो पहिया चार पहिया वाहन आदि संसाधन व सुविधाएं ना हो।लेकिन यहां पक्के मकान और वाहन आदि संसाधन व सुविधाएं होने बावजूद आवास का लाभ बेरोकटोक दिया गया। जबकि नियम के मुताबिक पात्रता की जांच सचिव व सेक्टर प्रभारी को करनी होती है। घर घर जाकर आवेदन करने वाले व्यक्ति के परिवार के बारे में जानकारी संसाधन सुविधाओं आदि को पता लगाकर देखना होता है, लेकिन जिम्मेदार इसे कमाई का जरिया बनाकर बगैर जांच किए ही कुर्सी पर बैठकर कोरम पूरा कर आवास आवंटित कर देते हैं। जांचकर्ता आंख मूंदकर अपात्रों को पात्र घोषित कर देते हैं। सूत्र बताते हैं कि सूची में शामिल लाभार्थियों से ग्राम प्रधान द्वारा धन उगाही भी जमकर की गई।

जांच के नाम पर खानापूर्ति शिकायतों का अंबार

पीएम आवास योजना का लाभ दिलाने के साथ अपात्रों के चयन व पात्रों को अपात्र करने को लेकर शायद ही कोई ऐसा गांव होगा जहां गड़बड़ी न हुई हो। अगर शासन द्वारा निष्पक्ष तरीके से जांच कराई जाय तो आधे से अधिक लाभार्थी अपात्र मिल जाएंगे।

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