📰 रिपोर्ट –देवरिया संवाददाता
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। शहर की गलियों से लेकर गाँवों के रास्तों तक, बिजली के झूलते तार अब मौत का जाल बन चुके हैं। बरसात के मौसम में गीले खंभे और खुले तार आम जनता की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। अफसोस की बात यह है कि शिकायतों के बावजूद भी विद्युत विभाग की अनदेखी और सुस्ती जारी है।
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जहाँ एक ओर सरकार “सुरक्षित भारत” की बात करती है, वहीं जमीनी हकीकत में बिजली व्यवस्था का जाल खुद ही खतरे का सबब बनता जा रहा है। छोटे बच्चे स्कूल जाते समय इन तारों से डरते हैं, तो बुजुर्ग राह बदलकर निकलने को मजबूर हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार अधिकारीयों को शिकायत दी गई, परंतु “फाइलों की धूल” में समस्याएँ दबी रह गईं। कहीं तार पेड़ों से उलझे हैं, तो कहीं खंभों की जड़ें जमीन से हिल चुकी हैं। थोड़ी सी आंधी या बरसात भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
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समाज का सबसे दुखद पहलू यह है कि जब तक कोई हादसा नहीं होता, तब तक कोई कार्रवाई नहीं होती। यह लापरवाही सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि समाज की संवेदनहीनता की भी कहानी है। हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह आवाज उठाए, अपने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी दिखाए।
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आज जरूरत है “बिजली सुधार” की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी सुधार की — क्योंकि एक चिंगारी सिर्फ तार नहीं जलाती, कई घरों के सपने भी राख कर देती है।
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